झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने और हाथियों के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। Wildlife Protection Society of Jharkhand और Wildlife Trust of India के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम महिलौंग-कालीमाटी एलीफेंट कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले बड़ा चांगरू गांव में आयोजित हुआ। कार्यशाला में स्थानीय ‘हाथी भगाओ दल’ के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान हाथियों से सामना होने पर सुरक्षित तरीके अपनाने, ग्रामीणों की जान-माल की रक्षा करने और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर जरूरी जानकारी दी गई।
मानव-हाथी संघर्ष रोकने पर विशेष जोर
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य हाथियों और इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष को कम करना था। हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को कई बार जान-माल, घरों और खड़ी फसलों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में जागरूकता और सही समय पर सुरक्षित कदम उठाना बेहद जरूरी है।
इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला में ग्रामीणों को बताया गया कि हाथियों की मौजूदगी के दौरान घबराहट या जल्दबाजी में ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे स्थिति और खतरनाक हो जाए। हाथियों के व्यवहार को समझने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर संबंधित वनकर्मियों या प्रशिक्षित दल से मदद लेने के महत्व पर जोर दिया गया।
‘हाथी भगाओ दल’ को बताए गए सुरक्षित तरीके
कार्यशाला में स्थानीय ‘हाथी भगाओ दल’ के सदस्यों को हाथियों के झुंड का सामना होने की स्थिति में सुरक्षित तरीके अपनाने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने समझाया कि हाथियों को बिना नुकसान पहुंचाए उनकी आवाजाही को जंगल की ओर बनाए रखने के लिए सावधानी और उचित समन्वय जरूरी है।
इस दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि हाथियों को घेरने, उनके बहुत करीब जाने या उन्हें उकसाने जैसी गतिविधियों से बचना चाहिए। हाथियों के व्यवहार में अचानक बदलाव आने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देना और प्रशिक्षित वन विभाग के कर्मियों के निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।
कार्यशाला के जरिए दल के सदस्यों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि हाथियों को सुरक्षित दिशा में ले जाने की कोशिश करते समय उनकी और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
फसलों, घरों और ग्रामीणों की सुरक्षा के उपाय
कार्यशाला में ग्रामीणों को हाथियों की आवाजाही के दौरान अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई। हाथियों के गांव के आसपास दिखाई देने पर भीड़ लगाने, उनके करीब जाकर फोटो या वीडियो बनाने और उन्हें भगाने के लिए खतरनाक तरीके अपनाने से बचने की सलाह दी गई।
इसके साथ ही फसलों और संपत्ति को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सामूहिक सतर्कता तथा समय पर सूचना देने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। ग्रामीणों और ‘हाथी भगाओ दल’ के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी समय रहते साझा की जा सके और आपात स्थिति में सुरक्षित कार्रवाई की जा सके।
हाथियों का संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा दोनों जरूरी: अभिषेक चौबे
इस मौके पर अभिषेक चौबे ने कहा कि मुख्य उद्देश्य हाथियों का संरक्षण करने के साथ ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जब ग्रामीण और सुरक्षा दल जागरूक होंगे, तभी इंसानों और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व संभव हो सकेगा।
उन्होंने कार्यशाला जैसी पहलों को महत्वपूर्ण बताते हुए मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी और आपसी समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का लिया संकल्प
कार्यशाला के समापन पर उपस्थित ग्रामीणों और ‘हाथी भगाओ दल’ के सदस्यों ने कॉरिडोर क्षेत्र में सुरक्षा नियमों का पालन करने और हाथियों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखने का संकल्प लिया।
Wildlife Protection Society of Jharkhand और Wildlife Trust of India की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को जागरूक बनाकर मानव-हाथी संघर्ष की आशंका को कम करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के प्राकृतिक आवास और आवाजाही के रास्तों का संरक्षण करने के साथ ग्रामीणों को सुरक्षित व्यवहार की जानकारी देना भी बेहद महत्वपूर्ण है। जागरूकता, सतर्कता और समन्वय के माध्यम से इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव कम करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।


