रांची: कांके रिंग रोड स्थित आदर्श नगर में समेति निदेशक रामशंकर प्रसाद के घर हुई करीब 3.50 करोड़ रुपये की डकैती के मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें नागेंद्र सिंह चौहान, मोनू सिंह और कुंदन कुमार को अहम संदिग्ध माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों और उनकी भूमिका को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
नागेंद्र सिंह चौहान को मुख्य आरोपी के तौर पर उठाए जाने की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने नागेंद्र सिंह चौहान को मुख्य आरोपी के तौर पर हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि वह अलकापुरी का रहने वाला है और उसका पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है। वहीं, मोनू सिंह और डकैती में इस्तेमाल की गई गाड़ी के मालिक के कुंदन कुमार को भी मामले में प्रमुख अभियुक्त माना जा रहा है।
सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि मोनू सिंह के चचेरे भाई सोनू सिंह की भूमिका की भी आशंका जताई जा रही है। बताया जाता है कि सोनू सिंह नगर निगम में ठेकेदारी का काम करता है।
डकैती में इस्तेमाल गाड़ी के मालिक का बेटा भी संदेह के घेरे में…
इस मामले में इस्तेमाल की गई इनोवा गाड़ी पुलिस पहले ही बरामद कर चुकी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गाड़ी रातू रोड के इंद्रपुरी निवासी कुंदन कुमार के नाम पर पंजीकृत थी। अब सूत्रों के मुताबिक, कुंदन कुमार को भी मामले में अहम संदिग्ध माना जा रहा है। पुलिस जांच में गाड़ी और उससे जुड़े लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
दिनदहाड़े परिवार को बंधक बनाकर हुई थी डकैती
गौरतलब है कि मंगलवार सुबह करीब 7:30 बजे सात डकैत इनोवा से कांके के आदर्श नगर स्थित समेति निदेशक रामशंकर प्रसाद के घर पहुंचे थे। आरोप है कि हथियार के बल पर परिवार के पांच सदस्यों को बंधक बनाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद घर के अलग-अलग कमरों की तलाशी लेकर जेवर और नकदी समेत करीब 3.50 करोड़ रुपये का सामान लूट लिया गया था।
वारदात के बाद आरोपी पिठौरिया की ओर फरार हो गए थे। बाद में पुलिस को सुतियांबे के पास लावारिस हालत में डकैती में इस्तेमाल की गई गाड़ी मिली थी।
पुलिस की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि कांके डकैती कांड को अंजाम देने के लिए बाहर से भी लोगों को बुलाया गया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में शामिल संदिग्धों में कोई टेंपो चालक है, तो कोई कार चलाता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए अलग-अलग लोगों ने मिलकर काम किया और इसके पीछे एक संगठित गिरोह हो सकता है। हालांकि, बाहर से लोगों को बुलाए जाने और गिरोह की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल सूत्रों के हवाले से सात लोगों को हिरासत में लिए जाने और कुछ संदिग्धों की पहचान सामने आने की जानकारी मिल रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से अब तक इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
खबर अपडेट हो रही है…
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