खुदीराम बोस से लेकर पानी की समस्या और छाऊ मुखौटों तक, विद्यार्थियों ने AI तकनीक से दिखाई अपनी रचनात्मकता; बॉलीवुड फिल्ममेकर अमित कुमार मिश्रा ने किया मार्गदर्शन

रांची। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से फिल्म निर्माण की दुनिया को बदल रहा है। इसी बदलते दौर में फिल्म निर्माण की नई तकनीकों और संभावनाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (SJMC) द्वारा विद्यार्थियों की ओर से निर्मित AI फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया।
इस फिल्म स्क्रीनिंग में विद्यार्थियों ने AI तकनीक का उपयोग करते हुए विभिन्न ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कई लघु फिल्में प्रस्तुत कीं। इनमें स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस के जीवन और योगदान, पानी की समस्या, झारखंड की पारंपरिक छाऊ कला एवं मुखौटों की संस्कृति तथा अखबार और मोबाइल स्क्रीन के बीच बदलते मीडिया परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। विद्यार्थियों की फिल्मों में विषयों की विविधता के साथ-साथ तकनीकी प्रयोग और रचनात्मक प्रस्तुति भी देखने को मिली।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका, उसकी संभावनाओं और भविष्य में सिनेमा पर पड़ने वाले प्रभाव से परिचित कराना था। स्क्रीनिंग के दौरान इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि किस प्रकार AI तकनीक फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है और आने वाले समय में कहानी कहने, दृश्य निर्माण तथा फिल्म निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
कार्यक्रम में मेरा टीवी फिल्म फेस्टिवल से आए निर्णायक मंडल के सदस्यों के साथ बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अभिनेता, फिल्ममेकर एवं उद्यमी अमित कुमार मिश्रा ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा निर्मित फिल्मों को देखा और उनके विषय, कहानी, प्रस्तुति एवं तकनीकी प्रयोगों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण की बारीकियों, बेहतर कहानी चयन और नई तकनीकों के रचनात्मक इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। साथ ही विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण के बदलते स्वरूप, AI के रचनात्मक उपयोग और भविष्य में मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग में आने वाले अवसरों को समझने का अवसर मिला। विशेषज्ञों के साथ संवाद ने विद्यार्थियों को अपने काम का मूल्यांकन करने और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस फिल्म स्क्रीनिंग को सफल बनाने में स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के विभागाध्यक्ष एवं विभाग के शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शिक्षकों के मार्गदर्शन और सहयोग से विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता एवं तकनीकी दक्षता प्रदर्शित करने का मंच मिला।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि तकनीक केवल फिल्म निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि नई कहानियों को नए अंदाज में दर्शकों तक पहुंचाने का एक सशक्त साधन भी बन रही है।


