बोकारो: मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन मिले तो खेती भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन सकती है। इसकी मिसाल चंद्रपुरा प्रखंड के जुनोरी गांव की रहने वाली बागेश्वरी देवी हैं। कभी पारंपरिक खेती और मजदूरी पर निर्भर रहने वाले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अब बेहतर हुई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने धान के साथ सब्जियों की खेती का विस्तार किया। इसका असर यह हुआ कि उनकी वार्षिक आय बढ़कर करीब सात लाख रुपये तक पहुंच गई।

पूंजी की कमी के कारण सीमित थी खेती
बागेश्वरी देवी, पति तुलसी राम महतो के साथ जुनोरी गांव में रहती हैं। पहले परिवार की आजीविका मुख्य रूप से पारंपरिक खेती और मजदूरी पर निर्भर थी। कम उत्पादन और पूंजी की कमी के कारण वह अपनी उपलब्ध कृषि भूमि का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती थीं। घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी परिवार को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
मांसा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मिली नई राह
आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से बागेश्वरी देवी मांसा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यह समूह जुनोरी ग्राम संगठन के अंतर्गत संचालित है और तेलो संकुल स्तरीय संगठन से संबद्ध है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण और प्रशिक्षण की सुविधा मिली। समूह से मिले छोटे-बड़े ऋण का इस्तेमाल उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाने में किया।
वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने धान की खेती के साथ सब्जियों का उत्पादन भी शुरू किया। बीज की व्यवस्था, खाद का उपयोग, सिंचाई और फसलों की देखभाल पर ध्यान देकर उन्होंने खेती को पहले से अधिक व्यवस्थित बनाया।
धान के साथ सब्जी उत्पादन ने बढ़ाई कमाई
बागेश्वरी देवी अपनी उपज को स्थानीय बाजार में बेचकर आमदनी अर्जित कर रही हैं। खेती में विविधता अपनाने और उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करने से उनकी आय के अवसर बढ़े हैं। वर्तमान में उनकी वार्षिक आय करीब सात लाख रुपये बताई गई है।
खेती से होने वाली कमाई अब बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और परिवार की दूसरी जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है। बागेश्वरी देवी अब अपने अनुभवों के जरिए आसपास की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और खेती के माध्यम से आजीविका बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।
ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता में अहम भूमिका निभा रहे स्वयं सहायता समूह
बोकारो के डीसी श्री अजय नाथ झा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने और जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बागेश्वरी देवी की सफलता बताती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाला ऋण, प्रशिक्षण और सामूहिक सहयोग ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव ला सकता है। इससे महिलाएं अपनी क्षमता पहचानकर आजीविका के नए अवसर विकसित कर सकती हैं।


