लातेहार जिले के मनिका प्रखंड स्थित जालिमा गांव का राजा बांध टोला आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से दूर है। यहां रहने वाले 10 से 12 आदिवासी परिवारों की जिंदगी बिजली, सड़क और स्वच्छ पेयजल के बिना गुजर रही है। हालात ऐसे हैं कि सूरज ढलते ही पूरा टोला अंधेरे में डूब जाता है और पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को नदी पर निर्भर रहना पड़ता है। इतना ही नहीं, टोले तक पहुंचने के लिए करीब तीन किलोमीटर पगडंडी और रास्ते में दो नदियां पार करनी पड़ती हैं।

नदी का पानी पीने को मजबूर, अंधेरे में गुजरती हैं रातें
राजा बांध टोला में अब तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंची है। शाम होते ही पूरे इलाके में अंधेरा छा जाता है। ग्रामीणों को रोशनी के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है। पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां के परिवार सालभर नदी के पानी पर निर्भर हैं। बरसात के दिनों में नदी का पानी गंदा हो जाने पर लोग बारिश के पानी से काम चलाते हैं। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ती है।
तीन किलोमीटर पगडंडी और दो नदियां पार कर पहुंचते हैं मुख्य सड़क तक
टोले तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तो दूर, बेहतर रास्ता भी उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण करीब तीन किलोमीटर तक उबड़-खाबड़ पगडंडी पर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। इस दौरान उन्हें दो नदियां भी पार करनी पड़ती हैं। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। किसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचना भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
स्कूल एक किलोमीटर दूर, फिर भी एक भी बच्चा नहीं जाता
टोले की सबसे चिंताजनक तस्वीर शिक्षा के क्षेत्र में दिखाई देती है। यहां से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्कूल होने के बावजूद टोले का एक भी बच्चा विद्यालय नहीं जाता। ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चों के आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र नहीं बने हैं। इसी वजह से उनका स्कूल में नामांकन नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीण महिला मुनिता देवी बताती हैं कि टोले में एक भी बच्चा स्कूल नहीं जाता। जरूरी दस्तावेजों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है। इससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने का इंतजार
राजा बांध टोला में रहने वाले इन परिवारों के सामने बिजली, सड़क, पेयजल और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। सवाल है कि विकास योजनाओं के बावजूद ये परिवार अब तक इन सुविधाओं से वंचित क्यों हैं? बच्चों के दस्तावेज बनवाकर उनका नामांकन कराने और ग्रामीणों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रशासन कब पहल करेगा?


