दीपों का पर्व दीपावली इस वर्ष 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या के अवसर पर देशभर में लोग अपने घरों को दीपों और रंगोली से सजाएंगे। शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन और वैभव का आगमन होता है। वहीं, भगवान गणेश की आराधना से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने और बुद्धि-विवेक की प्राप्ति की कामना की जाती है।

इस बार दीपावली की तारीख को लेकर 8 और 9 नवंबर के बीच कुछ लोगों में भ्रम है। हालांकि, अमावस्या तिथि और प्रदोष काल के संयोग के आधार पर मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन 8 नवंबर की शाम को किया जाएगा।
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान स्थिर लग्न यानी वृषभ लग्न में पूजा करना शुभ माना जाता है।
दीपावली पूजा 2026
शाम 5:31 से 7:29 बजे तक
रांची, झारखंड के लिए लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त
| पंचांग विवरण | समय |
|---|---|
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे |
| प्रदोष काल | शाम 5:07 से 7:41 बजे |
| वृषभ लग्न | शाम 5:31 से 7:29 बजे |
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इसी दौरान मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है। मान्यता है कि इस लग्न में पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव स्थायी रहता है।
दीपावली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है?
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करने के पीछे विशेष धार्मिक मान्यता है। हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, शुभ कार्यों के आरंभ और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है।
मान्यता है कि केवल धन प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस धन का सही इस्तेमाल करने के लिए बुद्धि और विवेक भी जरूरी है। इसी वजह से दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की कृपा से घर में धन और समृद्धि आती है, जबकि भगवान गणेश की आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की कामना की जाती है। यही वजह है कि दीपावली की पूजा में दोनों देवताओं को विशेष स्थान दिया गया है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का क्या है धार्मिक महत्व?
दीपावली को लेकर हिंदू धर्म में कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय मान्यता भगवान श्रीराम से जुड़ी है। मान्यता है कि 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद जब भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे, तब नगरवासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाए थे। इसी खुशी में पूरे अयोध्या नगर को दीपों से सजाया गया था। तभी से दीपावली को प्रकाश और खुशियों के पर्व के रूप में मनाने की परंपरा जुड़ी हुई है।
वहीं, एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। उन्हें धन, संपन्नता और सौभाग्य की देवी माना गया। इसी कारण कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
दीपावली का आध्यात्मिक संदेश अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की जीत भी है।
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा कैसे करें? जानें पूरी पूजा विधि
दीपावली के दिन घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विधि-विधान से की जाती है। पूजा करने के लिए जरूरी नहीं कि बहुत कठिन अनुष्ठान किया जाए। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ सामान्य विधि से भी पूजा की जा सकती है।
1. घर और पूजा स्थल की सफाई करें
दीपावली के दिन सुबह घर की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाएं और फूलों से सजावट करें। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ और सुंदर घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है।
2. पूजा की चौकी तैयार करें
शाम को शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। साथ में मां सरस्वती और कुबेर देव की पूजा भी परंपरा के अनुसार की जा सकती है।
3. पूजा की सामग्री एकत्रित करें
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
रोली, कुमकुम और अक्षत (साबुत चावल)
फूल और माला
धूप, अगरबत्ती और कपूर
घी या तेल के दीपक
कलश, जल, नारियल और आम के पत्ते
फल, मिठाई और बताशे
पान, सुपारी और दक्षिणा
सिक्के और पूजा के लिए बही-खाता
4. सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। सबसे पहले गणेश जी को तिलक लगाएं, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद मंत्र का जाप करें।
गणेश मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः।
5. मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें
इसके बाद मां लक्ष्मी को फूल, माला, कुमकुम, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। मां लक्ष्मी के सामने दीपक जलाएं और धन, सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करें।
मां लक्ष्मी का मंत्र:
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः।
इसके बाद मां लक्ष्मी की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ आरती में शामिल हो सकते हैं।
6. दीप जलाएं और प्रसाद वितरित करें
पूजा पूरी होने के बाद घर के मुख्य दरवाजे, आंगन, खिड़कियों और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। इसके बाद परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों में प्रसाद वितरित करें।
दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
दीपावली को दीपों का त्योहार कहा जाता है। इस दिन घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक जलाना अंधकार को दूर कर सकारात्मकता और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है।
घर के मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाएं।
पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं।
घर के आंगन और बालकनी में दीप सजाएं।
मंदिर और तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा निभाएं।
दीपक ऐसी सुरक्षित जगह रखें, जहां आग लगने का खतरा न हो।
दीपकों की कोई एक अनिवार्य संख्या सभी परिवारों के लिए निर्धारित नहीं है। अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार दीप जलाए जा सकते हैं।
दीपावली पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पूजा स्थल और घर को साफ-सुथरा रखें।
पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक आराधना करें।
गणेश जी की पूजा के बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें।
घर में दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
पटाखे जलाते समय बच्चों को अकेला न छोड़ें।
जरूरतमंदों की मदद करें और गरीबों के बीच मिठाई या भोजन बांटें।
दीपावली 2026 के पांच दिनों का त्योहार कैलेंडर
| त्योहार | तारीख |
|---|---|
| धनतेरस | 6 नवंबर |
| छोटी दीपावली / नरक चतुर्दशी | 8 नवंबर, प्रातः |
| दीपावली और लक्ष्मी पूजा | 8 नवंबर |
| गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर |
| भाई दूज | 11 नवंबर |
दीपावली का असली संदेश क्या है?
दीपावली केवल धन और संपत्ति की पूजा का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता, प्रेम, भाईचारे और खुशहाली लाने का पर्व भी है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के माध्यम से लोग अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं।
यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में धन के साथ ज्ञान, विवेक, सद्भाव और अच्छे कर्मों का होना भी जरूरी है। दीपावली पर जलने वाला हर दीपक इसी संदेश का प्रतीक है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रकाश हमेशा अंधकार पर विजय प्राप्त करता है।


