बोकारो: श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल में बुधवार को अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त अजय नाथ झा मुख्य रूप से शामिल हुए। इस दौरान विद्यालय के नव चयनित स्टूडेंट काउंसिल के सदस्यों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कार्यक्रम में हाउस प्रीफेक्ट, हाउस कैप्टन, वाइस कैप्टन, ज्वाइंट सेक्रेटरी, स्कूल हेड बॉय और हेड गर्ल समेत अन्य छात्र पदाधिकारियों को उनके दायित्वों की जिम्मेदारी दिलाई गई।
उपायुक्त ने सभी नव चयनित छात्र नेताओं को उनके नए दायित्वों के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें नेतृत्व की वास्तविक भावना समझाई। उन्होंने कहा कि लीडर का अर्थ सबसे आगे खड़े रहना नहीं, बल्कि सबसे पीछे खड़े व्यक्ति को आगे लाना है।
हर विद्यार्थी में होती है कोई न कोई खास प्रतिभा
अपने संबोधन में उपायुक्त ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के अंदर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। कोई पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो किसी की रुचि खेल, कला, संस्कृति या किसी अन्य क्षेत्र में होती है। ऐसे में एक अच्छे लीडर की जिम्मेदारी केवल खुद आगे बढ़ने की नहीं, बल्कि टीम के हर सदस्य की क्षमता को पहचानने और उसे आगे बढ़ने का अवसर देने की है।
उन्होंने छात्र नेताओं से कहा कि वे अपनी टीम के प्रत्येक सदस्य को प्रोत्साहित करें और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ें। उनके अनुसार सच्ची महानता दूसरों को अपनी महानता का एहसास कराने में नहीं, बल्कि सामने वाले व्यक्ति को उसकी अपनी क्षमता और महत्व का एहसास कराने में है। विद्यार्थियों को ऐसा नेतृत्व विकसित करना चाहिए, जिससे टीम के प्रत्येक सदस्य में आत्मविश्वास, उत्साह और बेहतर करने की भावना पैदा हो।
टीम की सफलता के लिए लीडर पर भरोसा जरूरी
उपायुक्त ने विद्यार्थियों को टीम भावना का महत्व समझाया कि जब किसी टीम का नेतृत्व किसी एक व्यक्ति को सौंपा जाता है, तो पूरी टीम की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने लीडर का सम्मान करे और उसके निर्णयों पर विश्वास रखे।
उन्होंने क्रिकेट टीम का उदाहरण देते हुए कहा कि मैदान पर परिस्थितियों के अनुसार कप्तान अलग-अलग निर्णय ले सकता है, लेकिन टीम की सफलता के लिए सभी खिलाड़ियों का कप्तान के फैसले पर भरोसा रखना और उसके साथ मजबूती से खड़ा होना जरूरी है। विद्यालय में भी यही भावना होनी चाहिए। विद्यार्थियों को अपने लीडर्स पर भरोसा रखना चाहिए, जबकि लीडर्स को अपने व्यवहार और फैसलों के माध्यम से इस विश्वास को हमेशा कायम रखने का प्रयास करना चाहिए।
AI का इस्तेमाल करें, लेकिन बुनियादी ज्ञान को मजबूत रखें
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने विद्यार्थियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के पास AI एक महत्वपूर्ण तकनीकी साधन के रूप में उपलब्ध है। इसका इस्तेमाल सीखने, नई जानकारी हासिल करने और अपने कार्यों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।
हालांकि उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि केवल AI पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का मूल ज्ञान, किताबों, पाठ्यक्रम और स्थापित तथ्यों की समझ मजबूत होनी चाहिए। यही बुनियादी ज्ञान उन्हें AI से प्राप्त जानकारी को सही और गलत के बीच परखने में मदद करेगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी संवेदनशीलता, सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाए रखने की अपील की।
बदलती तकनीक के साथ खुद को विकसित करने की जरूरत
तकनीक का दौर तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में बदलाव की गति और तेज होगी। ऐसे में विद्यार्थियों को समय के साथ खुद को लगातार विकसित करना होगा। AI का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए केवल तकनीक का उपयोग करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वयं सोचना और सही सवाल पूछना सीखना भी जरूरी है। विद्यार्थियों को तकनीक को अपने ज्ञान और क्षमता को बढ़ाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी, स्टाफ एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह के माध्यम से नव चयनित छात्र नेताओं को उनके पदों की जिम्मेदारी के साथ-साथ नेतृत्व, टीम भावना, जिम्मेदारी और तकनीक के संतुलित इस्तेमाल का संदेश दिया गया।
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