रांची। राजधानी रांची में वाहन चालकों को एक बार फिर ईंधन की कीमतों का झटका लगा है। गुरुवार, 3 सितंबर 2026 की सुबह 6 बजे से पेट्रोल और डीजल की कीमत में 38 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हो गई है। झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता प्रमोद कुमार के अनुसार, तेल कंपनियों की ओर से नई दरें पेट्रोल पंपों को भेज दी गई हैं और इसी के आधार पर राज्य में ईंधन की बिक्री की जा रही है।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर रांची समेत झारखंड के वाहन चालकों की जेब पर पड़ेगा। खासकर रोजाना बाइक, कार, ऑटो या अन्य निजी वाहनों से सफर करने वाले लोगों के लिए ईंधन का बढ़ता खर्च घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है।
सुबह 6 बजे से लागू हुई नई दर
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत में 38 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। नई कीमतें 3 सितंबर की सुबह 6 बजे से प्रभावी हुई हैं। यानी बुधवार रात तक जो दर लागू थी, उसके मुकाबले गुरुवार सुबह से उपभोक्ताओं को प्रत्येक लीटर ईंधन के लिए 38 पैसे अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।
हालांकि, अलग-अलग शहरों में परिवहन लागत और स्थानीय स्तर पर लागू कीमतों के कारण पेट्रोल-डीजल के अंतिम खुदरा भाव में अंतर हो सकता है। हालिया ऑनलाइन फ्यूल-रेट ट्रैकर्स में भी रांची के भाव में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है।
पहले भी कीमतों में देखने को मिला है उतार-चढ़ाव
झारखंड में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले कुछ महीनों के दौरान कई बार बदलाव देखने को मिले हैं। मई 2026 में भी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में ईंधन के दाम में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। उस दौरान रांची में कुछ ही दिनों के अंतराल पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार इजाफा हुआ था।
इसके बाद भी अलग-अलग दिनों में शहरवार कीमतों में मामूली बढ़ोतरी और कमी होती रही है। अप्रैल में रांची में पेट्रोल और डीजल दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि झारखंड के अन्य शहरों में स्थिति अलग रही थी। इससे साफ है कि राज्य में ईंधन की कीमतों में स्थानीय स्तर पर लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और टैक्स का भी असर
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर, केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर और तेल कंपनियों की कीमत निर्धारण व्यवस्था प्रमुख हैं।
यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम एक जैसे नहीं होते। इसके अलावा स्थानीय परिवहन और डीलर स्तर की लागत भी अंतिम खुदरा कीमत को प्रभावित कर सकती है।
हाल में केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े शुल्क ढांचे में भी बदलाव किया है। हालांकि, इसका घरेलू पेट्रोल पंपों पर गुरुवार से लागू 38 पैसे की बढ़ोतरी से सीधा संबंध होने की पुष्टि अलग से नहीं की गई है।
वाहन चालकों की बढ़ सकती है परेशानी
ईंधन के दाम में भले ही 38 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी मामूली नजर आए, लेकिन नियमित रूप से अधिक मात्रा में पेट्रोल या डीजल खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर इसका संचयी असर पड़ सकता है। खासकर रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले कर्मचारियों, व्यवसायिक वाहनों, टैक्सी और मालवाहक वाहनों के संचालन की लागत बढ़ सकती है।
डीजल की कीमत बढ़ने का अप्रत्यक्ष असर परिवहन लागत के जरिए बाजार पर भी पड़ सकता है। माल ढुलाई महंगी होने पर सब्जी, फल, किराना और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी दबाव बनने की संभावना रहती है। हालांकि, 38 पैसे की मौजूदा बढ़ोतरी से जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कितना वास्तविक असर पड़ेगा, यह स्थानीय बाजार और परिवहन लागत पर निर्भर करेगा।
फिलहाल रांची में 3 सितंबर की सुबह 6 बजे से पेट्रोल और डीजल दोनों 38 पैसे प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। ऐसे में महीने की शुरुआत में ही वाहन चालकों को ईंधन के लिए पहले की तुलना में कुछ अधिक रकम खर्च करनी होगी।


