हजारीबाग: हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के डीएफओ एवं IFS अधिकारी मौन प्रकाश के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर अब शिकायतकर्ता ने विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व हजारीबाग जिलाध्यक्ष शम्भूलाल यादव ने 11 सितंबर 2026 को वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अवर सचिव को औपचारिक आपत्ति प्रत्यावेदन सौंपते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने वन सचिव अबु बकर सिद्दीकी पर भी आरोपी अधिकारी को प्रशासनिक संरक्षण देने और शिकायत पर कार्रवाई में शिथिलता बरतने का आरोप लगाया है। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री के समक्ष दिसंबर 2025 में दी गई थी शिकायत
शम्भूलाल यादव के मुताबिक, उन्होंने 30 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री सचिवालय के समक्ष डीएफओ मौन प्रकाश के खिलाफ पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार से संबंधित परिवाद दिया था। इसके बाद विभाग की ओर से पत्रांक 702 दिनांक 20 फरवरी 2026 और पत्रांक 2057 दिनांक 27 मई 2026 के जरिए शिकायत के संबंध में शपथपत्र और साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने 29 जून 2026 को शपथपत्र प्रस्तुत कर दिया था। इसमें उन्होंने जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करने की बात कही थी।
विभागीय पत्र पर भी उठाए सवाल
शम्भूलाल यादव ने विभागीय पत्रांक 3109, दिनांक 4 अगस्त 2026 को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि साक्ष्यों की कमी का हवाला देकर मामले को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विभागीय कार्रवाई को कथित तौर पर ‘Colourable Exercise of Power’ बताते हुए स्वतंत्र जांच की आवश्यकता जताई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, साक्ष्यों का परीक्षण और उनकी प्रासंगिकता तय करना जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में बिना स्वतंत्र जांच अधिकारी या समिति गठित किए मामले पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का दिया हवाला
प्रत्यावेदन में शिकायतकर्ता ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने, साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। इसी संदर्भ में पत्र में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया गया है।
पार्क निर्माण में अनियमितता का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने 14 जुलाई और 9 सितंबर को पार्क निर्माण स्थल के निरीक्षण और भ्रमण से संबंधित जिओ-टैग डिजिटल तस्वीरें साक्ष्य के तौर पर संलग्न करने का दावा किया है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी अनियमितताएं और निम्न गुणवत्ता की सामग्री के इस्तेमाल की जांच होनी चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किए जाने तथा योजना का काम पूरा हुए बिना राशि की निकासी किए जाने जैसे आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग
शम्भूलाल यादव ने विभाग से पत्रांक 3109 को निरस्त करने, वरिष्ठ एवं निष्पक्ष जांच अधिकारी अथवा उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित करने, साक्ष्य एवं गवाह प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित तिथि, समय और स्थान की सूचना देने तथा जांच को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की है।
शिकायत की प्रतिलिपि लोकायुक्त, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को भी भेजे जाने की बात कही गई है। मौन प्रकाश, अबु बकर सिद्दीकी या वन विभाग की ओर से इन आरोपों पर पक्ष इस उपलब्ध सामग्री में दर्ज नहीं है।


