धनबाद: अपराध की जांच अब सिर्फ घटनास्थल, गवाहों और पारंपरिक सबूतों तक सीमित नहीं रह गई है। अपराध से जुड़ी कई अहम कड़ियां अब मोबाइल फोन के भीतर मौजूद डेटा से सामने आ सकती हैं। इसी बदलती जांच प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए धनबाद में पुलिसकर्मियों को मोबाइल फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया गया कि किसी मामले की जांच में मोबाइल फोन से मिलने वाली जानकारी को किस तरह पहचाना जाए, सुरक्षित रखा जाए और वैज्ञानिक तरीके से उसका विश्लेषण किया जाए। खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल साक्ष्य को संभालने में छोटी सी लापरवाही भी जांच के लिए महत्वपूर्ण जानकारी को प्रभावित कर सकती है।
मोबाइल में छिपे डेटा की जांच पर जोर
ट्रेनिंग में मोबाइल फोन से मिलने वाले अलग-अलग डिजिटल डेटा की जानकारी दी गई। इसमें सिम कार्ड, डिवाइस डिटेल, कॉल लॉग, मैसेज, चैट, कॉन्टैक्ट, फोटो-वीडियो, लोकेशन डेटा, ब्राउजर हिस्ट्री और मोबाइल ऐप से जुड़े डेटा शामिल हैं।
पुलिसकर्मियों को समझाया गया कि जांच के दौरान ऐसे डिजिटल साक्ष्यों को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें सही प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से उनके विश्लेषण से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग हासिल किए जा सकते हैं।
अपराध बदला तो जांच के तरीके भी बदलने जरूरी
ग्रामीण एसपी ने कहा कि आज लगभग हर तरह के अपराध की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुलिसकर्मियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना समय की जरूरत है।
दरअसल, मोबाइल फोन अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होने के साथ-साथ जांच के लिहाज से भी महत्वपूर्ण डिवाइस बन चुका है। इसमें मौजूद जानकारी किसी मामले की कड़ी जोड़ने में मदद कर सकती है। ऐसे में पुलिस के लिए सिर्फ मोबाइल जब्त करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें मौजूद डिजिटल साक्ष्यों को सही तरीके से सुरक्षित और समझना भी जरूरी है।
‘मोबाइल अब सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सुरागों में से एक’
प्रशिक्षक सुयश भारती ने कहा कि मोबाइल फोन अपराध की जांच में सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सुरागों में से एक बन चुका है। उनके मुताबिक, मोबाइल में मौजूद डेटा की सही पहचान, उसका सुरक्षित संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किसी केस को मजबूत आधार दे सकता है।
इस प्रशिक्षण का फोकस इसी बात पर रहा कि पुलिसकर्मी डिजिटल साक्ष्यों को केवल तकनीकी डेटा के तौर पर नहीं, बल्कि जांच में उपयोगी साक्ष्य के रूप में वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत संभालें।
Android और iOS की जांच प्रक्रिया भी अलग
प्रशिक्षण में Android और iOS मोबाइल फोन से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्यों के फॉरेंसिक महत्व पर भी चर्चा हुई। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम में डेटा की उपलब्धता, उसकी संरचना और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
यानी किसी मोबाइल से डिजिटल सबूत हासिल करने की प्रक्रिया हर डिवाइस में एक जैसी नहीं होती। जांच के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल के ऑपरेटिंग सिस्टम और उसमें उपलब्ध डेटा की प्रकृति को समझना भी फॉरेंसिक जांच का अहम हिस्सा है।
बदलते अपराध के दौर में मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों से मिलने वाले साक्ष्य जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को डिजिटल फॉरेंसिक की जानकारी देना जांच को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा सकता है।
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