चतरा: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कुंदा प्रखंड के बुटकुइया गांव की तस्वीर इन दावों के सामने फिर से बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। यहां प्रसव पीड़ा से कराह रही 28 वर्षीय रीता देवी को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। आखिरकार ग्रामीणों को महिला को खाट पर लिटाकर कंधे के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।
मामला सोमवार का है। रीता देवी को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी, लेकिन दो मुहायन नदी पर पुल नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने इंतजार करने के बजाय खाट को ही एंबुलेंस का विकल्प बनाया और प्रसूता को लेकर पैदल निकल पड़े।
एक किलोमीटर से ज्यादा खाट पर सफर
ग्रामीणों के मुताबिक, महिला को खाट पर लादकर एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक पैदल ले जाना पड़ा। इसके बाद मुख्य सड़क से वाहन की मदद लेकर उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कुंदा पहुंचाया गया।
यह सिर्फ एक महिला को अस्पताल पहुंचाने की परेशानी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में दो मुहायन नदी में पानी बढ़ने के साथ बुटकुइया और आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे समय में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्थिति और मुश्किल हो जाती है।
एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची तो सिस्टम तक सवाल पहुंचा
वार्ड सदस्य अशोक यादव और ग्रामीण बृजेश यादव व रामू गंझू के मुताबिक, गांव में आपात स्थिति आने पर एंबुलेंस तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मरीज को पहले किसी तरह मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है और उसके बाद ही वाहन से अस्पताल ले जाया जा सकता है।
यहीं से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा होता है। राज्य सरकार दुर्गम इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने को प्राथमिकता बताती है। वहीं, जून में स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सरकारी अस्पतालों की आपात सेवाओं और एंबुलेंस व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने जून 2026 में एंबुलेंस के 15 मिनट के भीतर पहुंचने की बात कही थी। ऐसे में बुटकुइया की घटना यह सवाल खड़े कर रही है कि जहां गांव तक पहुंचने के लिए सड़क और पुल की बुनियादी सुविधा ही नहीं है, वहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा का वादा जमीन पर कैसे पहुंचेगा?
ग्रामीणों की मांग है कि दो मुहायन नदी पर जल्द पुल बनाया जाए, ताकि किसी मरीज या प्रसूता को अस्पताल पहुंचने के लिए दोबारा खाट के सहारे एक किलोमीटर से ज्यादा पैदल न चलना पड़े।
यह मामला सिर्फ पुल निर्माण का नहीं, बल्कि उस आखिरी छोर की स्वास्थ्य व्यवस्था का है जहां अस्पताल की सुविधा तभी मायने रखती है, जब जरूरत पड़ने पर मरीज वहां तक पहुंच भी सके।


