मथुरा/वृंदावन: वृंदावन के एक संस्कृत गुरुकुल में मंगलवार रात जो हुआ, उसने सिर्फ चार परिवारों को गहरे सदमे में नहीं डाला, बल्कि आवासीय शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चैतन्य विहार स्थित महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में पानी की अंडरग्राउंड टंकी की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चार छात्रों की मौत हो गई। एक अन्य छात्र को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसा मंगलवार रात करीब 10 बजे का बताया जा रहा है। गुरुकुल परिसर में बनी अंडरग्राउंड टंकी करीब 12 फीट गहरी थी। पिछले कुछ दिनों से टंकी से दुर्गंध आने की बात सामने आई थी। इसी के बाद उसकी सफाई कराने का फैसला लिया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी गहरी और बंद टंकी में छात्रों को उतारने से पहले क्या गैस की जांच की गई थी और क्या उनके पास कोई सुरक्षा उपकरण मौजूद था?
एक उतरा, बेहोश हुआ… फिर उसे बचाने चार और नीचे गए
रिपोर्टों के मुताबिक, सबसे पहले एक छात्र टंकी के अंदर गया। कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। उसे बचाने की कोशिश में उसके चार साथी भी एक-एक करके टंकी के भीतर उतर गए। अंदर मौजूद जहरीली गैस ने उन्हें भी अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते पांचों छात्र बेहोश हो गए।
यह घटनाक्रम इस हादसे के सबसे भयावह पहलू को सामने लाता है। एक छात्र को बचाने की कोशिश में दूसरे छात्र भी उसी खतरे में फंसते चले गए। बंद और गहरी टंकी में गैस की मौजूदगी का अंदाजा छात्रों को नहीं था।
सूचना मिलने के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से छात्रों को टंकी से बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने मनु कटारे, विशु शर्मा, आर्यन पांडेय और देवांश शर्मा को मृत घोषित कर दिया। पांचवें छात्र रुद्राक्ष का इलाज जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
अब सवाल मौत से ज्यादा व्यवस्था पर
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि पानी की टंकी की सफाई जैसे जोखिम भरे काम के लिए छात्रों को क्यों उतारा गया? बंद भूमिगत टैंक में जहरीली गैस की मौजूदगी का खतरा रहता है। ऐसे स्थानों में बिना सुरक्षा जांच के प्रवेश करना जानलेवा हो सकता है।
कुछ रिपोर्टों में गुरुकुल के छात्रों से सफाई और दूसरे घरेलू काम कराए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
रिपोर्टों के मुताबिक गुरुकुल में करीब 200 छात्रों का पंजीकरण है और लगभग 100 छात्र परिसर में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। ऐसे में एक सवाल यह भी है कि इतने छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन इंतजाम कितने पर्याप्त थे।
संचालक की भूमिका भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद गुरुकुल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार घटना के बाद गुरुकुल संचालक मौके से चला गया। प्रशासन अब गुरुकुल की मान्यता, संचालन, सुरक्षा इंतजाम और छात्रों से टंकी की सफाई कराने की परिस्थितियों की जांच कर रहा है।
मथुरा के जिलाधिकारी ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हादसे का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत-बचाव और घायल छात्र के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं।
चार मौतों के बाद अब एक बड़ा सवाल
वृंदावन की इस घटना ने एक ऐसी लापरवाही को सामने ला दिया है, जिसकी कीमत चार परिवारों ने अपने बच्चों की जान देकर चुकाई। अगर टंकी से पहले ही बदबू आ रही थी, तो उसे सुरक्षित तरीके से साफ कराने के बजाय छात्रों को अंदर भेजने की नौबत क्यों आई? क्या गैस की जांच हुई थी? क्या किसी प्रशिक्षित कर्मचारी को बुलाया गया था? और क्या गुरुकुल में छात्रों की सुरक्षा के लिए तय मानकों का पालन हो रहा था?
अब इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से मिलने हैं। लेकिन फिलहाल एक बात साफ है—जिस टंकी की सफाई से गुरुकुल की परेशानी दूर होनी थी, वही चार छात्रों के परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द छोड़ गई।


