रांची : झारखंड सरकार की ओर से जेपीएससी की परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों के अधिवक्ताओं ने परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी TDPL की भूमिका, परीक्षा की पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।
प्रार्थियों की ओर से कहा गया कि परीक्षा रद्द करने का सरकार का फैसला प्राकृतिक न्याय (नेचुरल जस्टिस) के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। अपने पक्ष में अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए सरकार के आदेश को चुनौती दी।
प्रार्थियों ने उठाए परीक्षा रद्द करने के फैसले पर सवाल
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों के वकीलों ने TDPL की भूमिका और परीक्षा प्रक्रिया में उसकी भागीदारी को लेकर पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नियुक्ति प्रक्रिया के अंतिम चरण में परीक्षा रद्द करने का फैसला लेने से पहले संबंधित अभ्यर्थियों के पक्ष पर भी विचार किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, पूरी प्रक्रिया को रद्द करने के बजाय कथित गड़बड़ियों और प्रभावित अभ्यर्थियों के बीच अंतर करने पर विचार किया जाना चाहिए।
सरकार ने कहा- बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी
वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि परीक्षाओं में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हुई है। सरकार का कहना था कि ऐसी स्थिति में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना यानी सेग्रिगेशन संभव नहीं है। इस आधार पर सरकार ने परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का बचाव किया।
12 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
मामले में अब अगली सुनवाई सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:15 बजे से होगी। तब तक प्रार्थियों को पहले से मिली अंतरिम राहत बरकरार रहेगी। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और अदालत के रुख पर अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं।


