चतरा: चतरा के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। एक तरफ जहां चतरा पुलिस सुस्त है वहीं स्थानीय ग्रामीण पूरी तरह चुस्त हैं । ग्रामीणों ने पुलिस से अवैध कोयला और अवैध बालू से संबंधित शिकायत कई बार की है लेकिन इसपर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। तंग आकर ग्रामीणों ने अब इन माफियाओं के खिलाफ आवाज बुलंद करनी शुरु कर दी है। उड़सू नदी में अवैध बालू खनन के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बीच पुलिस संरक्षण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने ग्रामीणों से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए सुशी इंफ़्रा कम्पनी की एक पोकलेन मशीन और बोलेरो जब्त की है। वहीं, बालू के अवैध कारोबार में इस्तेमाल हो रहे वाहनों, खनन से जुड़े लोगों और संरक्षण देने वालों की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है।

जानकारी के अनुसार, उड़सू नदी से पोकलेन मशीन के जरिए बालू निकला जा रहा था और हाइवा के माध्यम से उसका परिवहन भी किया जा रहा था। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि टंडवा से निकाले गए बालू को केरेडारी क्षेत्र में जमा किया जा रहा था। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस पूरे नेटवर्क की जांच और इसमें शामिल लोगों की भूमिका अहम मानी जा रही है।
मामले में पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बालू के इस अवैध कारोबार को पुलिस वर्दी में तैनात एक व्यक्ति का संरक्षण मिल रहा था। ऐसे में जब पुलिस अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, तो वह व्यक्ति कौन है जो पुरे मामले में पर्दा डालने कि कोशिश कर रहा था।
सुशी इंफ्रा पहले भी रह चूका है विवादों में
सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड का नाम पहले भी अलग-अलग मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। नवंबर 2022 में तेलंगाना राज्य जीएसटी विभाग ने कंपनी के हैदराबाद स्थित बंजारा हिल्स कार्यालयों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में करीब 20 टीमों के लगभग 150 अधिकारी शामिल थे। कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड और वित्तीय विवरणों में कथित विसंगतियों की जांच के लिए यह कार्रवाई की गई थी।
झारखंड में भी कंपनी का नाम चंद्रगुप्त ओपन कास्ट परियोजना से जुड़े भूमि घोटाले में सामने आया था। इस मामले में करीब 417 एकड़ वन भूमि के रिकॉर्ड गायब होने और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप लगे थे। मामले में सीसीएल और राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कंपनी से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। इसके बाद सीआईडी जांच के आदेश दिए गए थे। यह मामला भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी की जांच से जुड़ा है।
कंपनी के कार्यालय पर दिनदहाड़े हुई थी गोलीबारी
अगस्त 2026 में चतरा जिले के टंडवा स्थित सुशी इंफ्रा के कार्यालय पर भी गोलीबारी की घटना हुई थी। इस हमले में एक सुरक्षा गार्ड गंभीर रूप से घायल हुआ था। घटना को लेकर राहुल दुबे गिरोह का नाम सामने आया था। इस घटना ने इलाके में कंपनी की सुरक्षा और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े हालात को लेकर भी सवाल खड़े किए थे।
अब उड़सू नदी में अवैध बालू खनन के मामले ने एक बार फिर कंपनी का नाम चर्चा में ला दिया है।
कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी
टंडवा में पोकलेन मशीन और बोलेरो की जब्ती के बाद अब यह पता लगाना जरूरी है कि बालू कहां से निकाला जा रहा था, उसका परिवहन कौन कर रहा था और इस कारोबार में किन लोगों की भूमिका थी। इसके साथ ही पुलिस की वर्दी पहने व्यक्ति को लेकर लगाए जा रहे संरक्षण के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। पोकलेन और बोलेरो की जब्ती के बाद यह देखना होगा कि अवैध बालू खनन के पूरे नेटवर्क तक जांच पहुंचती है या नहीं। साथ ही, संरक्षण देने के आरोपों की सच्चाई भी सामने आती है या दबा दी जाएगी। क्योंकि मामला सिर्फ नदी से बालू निकालने का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की जवाबदेही का भी है, जिसके रहते ऐसे कारोबार चलने के आरोप लग रहे है।
अब देखना होगा कि कार्रवाई सिर्फ मशीनों और गाड़ियों तक सीमित रहती है या उन माफियों तक भी पहुंचती है जो इस पुरे खेल के मास्टरमाइंड है ।


