रांची, 10 अक्टूबर 2026: मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़े नवीनतम शोध, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और न्यूरोसर्जरी की उन्नत विधियों पर चर्चा के साथ ANEICON 2026 के दूसरे दिन का समापन हुआ। एसोसिएशन ऑफ न्यूरोसाइंटिस्ट्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया (ANEI) के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन झारखंड न्यूरोसाइंसेस सोसाइटी (JNS) के संयुक्त तत्वावधान में रांची में किया जा रहा है। सम्मेलन में देश-विदेश से आए 300 से अधिक प्रतिनिधियों और 100 विशेषज्ञ वक्ताओं ने हिस्सा लिया। दिनभर आयोजित 10 से अधिक वैज्ञानिक सत्रों में शोध, नैदानिक अनुभव और आधुनिक उपचार पद्धतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
वैश्विक शोध और नई तकनीकों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
सम्मेलन के दूसरे दिन अमेरिका से आए डॉ. शंकर गोपीनाथ का विशेष व्याख्यान प्रमुख आकर्षण रहा। उन्होंने तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध और तकनीकी प्रगति पर प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही वैज्ञानिक अवधारणाओं और आधुनिक तकनीकों को समझने का अवसर मिला।
न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में लगातार हो रहे शोध से मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी जटिल समस्याओं को समझने के नए रास्ते खुल रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभव चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। सम्मेलन का उद्देश्य भी विशेषज्ञों के बीच ज्ञान साझा करने और चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर सहयोग को बढ़ावा देना रहा।
विज्ञान के साथ दर्शन और मानवीय मूल्यों पर चर्चा
वैज्ञानिक सत्रों के बीच डॉ. एच. पी. नारायण का दार्शनिक व्याख्यान भी चर्चा का केंद्र रहा। इस सत्र में मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को केवल चिकित्सकीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि नैतिकता, मानवीय मूल्यों और समग्र सोच के संदर्भ में समझने पर जोर दिया गया।
इस व्याख्यान ने विज्ञान और दर्शन के बीच संबंधों को रेखांकित किया। चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदनशीलता और नैतिक जिम्मेदारी का महत्व भी अहम है। सम्मेलन में इस तरह के विमर्श ने प्रतिभागियों को अपने पेशेवर अनुभवों से आगे बढ़कर व्यापक दृष्टिकोण से सोचने का अवसर दिया।
युवा शोधकर्ताओं की प्रस्तुतियों ने खींचा ध्यान
ANEICON 2026 के दूसरे दिन युवा न्यूरोसाइंटिस्ट्स की शोध प्रस्तुतियां भी विशेष आकर्षण रहीं। पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं ने अपने अकादमिक कार्यों, वैज्ञानिक निष्कर्षों और नए विचारों को विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया।
इन प्रस्तुतियों ने युवा प्रतिभाओं को अपने शोध पर चर्चा करने, विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त करने और दूसरे शोधकर्ताओं के कार्यों को समझने का मंच दिया। मस्तिष्क स्वास्थ्य और तंत्रिका संबंधी रोगों के उपचार से जुड़े नए विचारों ने भविष्य में शोध और चिकित्सा के क्षेत्र में संभावनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
डॉ. संदीप चटर्जी क्विज में परखा गया वैज्ञानिक ज्ञान
युवा न्यूरोसाइंटिस्ट्स के ज्ञान, वैज्ञानिक समझ और त्वरित निर्णय क्षमता को परखने के लिए डॉ. संदीप चटर्जी क्विज का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता ने सम्मेलन के शैक्षणिक माहौल को और सक्रिय बनाया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को अपने ज्ञान का परीक्षण करने और अन्य युवा विशेषज्ञों के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का अवसर मिला।
‘हाउ आई डू इट’ सत्र में न्यूरोसर्जरी की बारीकियों पर चर्चा
सम्मेलन के महत्वपूर्ण सत्रों में ‘How I Do It’ वीडियो सत्र भी शामिल रहा। इसमें अनुभवी न्यूरोसर्जन्स ने विभिन्न प्रकार की न्यूरोसर्जरी की प्रक्रियाओं को वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत किया। सर्जरी की तकनीकों, ऑपरेशन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उन्नत शल्य विधियों पर अनुभव साझा किए गए।
इस सत्र का उद्देश्य चिकित्सकों को वास्तविक प्रक्रियाओं की बारीकियों से परिचित कराना और उनके नैदानिक कौशल को बेहतर बनाने में सहायता करना था। विशेषज्ञों के अनुभवों से प्रतिभागियों को आधुनिक न्यूरोसर्जरी की तकनीकी जटिलताओं को समझने का अवसर मिला।
‘न्यूरल ब्रिजेज’ के जरिए सहयोग बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विराट हर्ष ने कहा कि ANEICON 2026 का उद्देश्य केवल अलग-अलग नैदानिक विधाओं के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना नहीं है, बल्कि देशों, संस्कृतियों और विचारों के बीच ज्ञान एवं सहयोग के सेतु तैयार करना भी है। उन्होंने डॉ. शंकर गोपीनाथ के अंतरराष्ट्रीय अनुभव, डॉ. एच. पी. नारायण के विचारों और युवा शोधकर्ताओं की वैज्ञानिक प्रस्तुतियों को सम्मेलन की विशेष उपलब्धि बताया।
झारखंड की संस्कृति से रूबरू हुए प्रतिनिधि
दिन के अंत में झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को राज्य की कला और संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिला।
वैज्ञानिक विमर्श और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के संगम के साथ सम्मेलन का दूसरा दिन संपन्न हुआ। अब सम्मेलन के अंतिम दिन के वैज्ञानिक सत्रों पर प्रतिभागियों की नजर रहेगी, जिनसे न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में नए विचारों और सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।


