Saturday, November 7

‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दिवाली’ अभियान के तहत 95 से अधिक शहरों में मिलेगी सुविधा, 12 नवंबर तक जारी रहेगी पहल…. प्राथमिक उपचार से लेकर जरूरत पड़ने पर सर्जरी तक का खर्च उठाएगा अस्पताल

रांची। दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा खतरा बच्चों की आंखों को रहता है। कई बार पटाखों की चिंगारी, बारूद और उड़ते हुए कण आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा देते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चों की आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसी खतरे को देखते हुए एएसजी हॉस्पिटल लिमिटेड ने बच्चों की आंखों की सुरक्षा के लिए विशेष पहल शुरू की है। कंपनी ने ‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दिवाली’ अभियान के तहत पटाखों से आंखों में चोट लगने वाले 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त इलाज देने की घोषणा की है।

कंपनी के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम के तहत यह सुविधा 4 नवंबर से 12 नवंबर 2026 तक देशभर में उपलब्ध रहेगी। अभियान 95 से अधिक शहरों में स्थित 200 से ज्यादा एएसजी आई हॉस्पिटल केंद्रों पर चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक परेशानी के कारण किसी बच्चे को समय पर आंखों का उपचार न मिल पाने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

प्राथमिक उपचार से लेकर सर्जरी तक मिलेगी सुविधा

इस अभियान के तहत पटाखों से संबंधित आंखों की चोटों से पीड़ित 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। इसमें प्राथमिक उपचार, आपातकालीन आंखों की देखभाल और जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी शामिल है। हालांकि, चश्मे और अन्य ऑप्टिकल उत्पाद इस सुविधा के दायरे में शामिल नहीं होंगे।

अभिभावक इलाज और नजदीकी अस्पताल केंद्र की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 1200 111 पर संपर्क कर सकते हैं। अस्पताल प्रबंधन की अपील है कि पटाखों से आंख में चोट लगने पर घरेलू उपचार करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क किया जाए।

पिछले साल 500 से अधिक बच्चों का हुआ था इलाज

एएसजी हॉस्पिटल के अनुसार, पिछले साल दिवाली के दौरान उसके विभिन्न केंद्रों पर पटाखों से आंखों में चोट लगने वाले 500 से अधिक बच्चों का इलाज किया गया था। हर साल त्योहार के दौरान आंखों की चोटों के मामले बढ़ जाते हैं। इनमें कॉर्निया और आंख के अगले हिस्से में चोट लगने की घटनाएं आम हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पटाखों से निकली चिंगारी, बारूद और छोटे कण आंखों की नाजुक संरचना को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ मामलों में चोट इतनी गंभीर हो सकती है कि समय पर इलाज नहीं मिलने पर दृष्टि स्थायी रूप से प्रभावित हो जाए। कई परिवार आर्थिक कारणों से अस्पताल पहुंचने में देरी करते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अस्पताल ने मुफ्त उपचार की पहल की है।

समय पर इलाज से बच सकती है बच्चों की आंखों की रोशनी

एएसजी आई हॉस्पिटल के रीजनल सीओओ डॉ. नितेश कुमार सिंह और डॉ. अंजलिका शेखर ने कहा कि बच्चों में पटाखों से होने वाली अधिकांश आंखों की चोटों को सावधानी बरतकर रोका जा सकता है। लेकिन दुर्घटना होने की स्थिति में बच्चे को कितनी जल्दी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास पहुंचाया जाता है, यह उसकी आंखों की रोशनी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि आंख में चोट लगने पर घरेलू नुस्खे न अपनाएं और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचें। उनका कहना है कि आर्थिक परेशानी किसी बच्चे के इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए।

पटाखे जलाते समय इन पांच बातों का रखें ध्यान

एएसजी आई हॉस्पिटल ने दिवाली के दौरान बच्चों और अभिभावकों के लिए पांच जरूरी सावधानियां बताई हैं।

  1. सुरक्षित दूरी रखें: पटाखे जलाते समय हाथ की पूरी दूरी बनाए रखें। लंबी अगरबत्ती का इस्तेमाल करें और पटाखा जलाने के तुरंत बाद पीछे हट जाएं।
  2. सुरक्षात्मक चश्मा पहनें: पटाखे जलाने वाले बच्चों और वयस्कों को सुरक्षा के लिए आईवियर पहनना चाहिए।
  3. बच्चों पर निगरानी रखें: बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें। हमेशा किसी वयस्क की देखरेख जरूरी है।
  4. जलते पटाखों पर न झुकें: किसी भी पटाखे के ऊपर झुककर उसे न देखें। जो पटाखा नहीं चला हो, उसके पास दोबारा जाने से बचें।
  5. आंख न रगड़ें: आंख में चिंगारी या कण जाने पर उसे रगड़ने से चोट और गंभीर हो सकती है।

आंख में चोट लगे तो क्या करें और क्या न करें?

अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, आंख में चोट लगने पर सबसे पहले बच्चे को शांत रखें। आंख को रगड़ें या दबाएं नहीं और उसमें फंसी किसी वस्तु को खुद निकालने की कोशिश न करें। तेज पानी की धार से आंख न धोएं। काजल, मलहम, आई ड्रॉप या कोई घरेलू नुस्खा भी न अपनाएं।

बिना दबाव डाले आंख को साफ शील्ड से हल्के से ढकें। इसके लिए पेपर कप का निचला हिस्सा इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1800 1200 111 पर संपर्क करें और बच्चे को नजदीकी एएसजी आई हॉस्पिटल या आई इमरजेंसी सेवा में ले जाएं।

सुरक्षित दिवाली मनाने की अपील

‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दिवाली’ अभियान के जरिए अस्पताल ने लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि त्योहार की खुशियां बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर नहीं हैं। थोड़ी सी सावधानी और समय पर चिकित्सा सहायता किसी बच्चे की आंखों की रोशनी बचा सकती है। इसलिए अभिभावकों को पटाखे जलाते समय बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने और दुर्घटना होने पर तुरंत विशेषज्ञ की मदद लेने की जरूरत है।

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