देशभर में बैंकिंग सेवाएं 28 से 30 सितंबर तक प्रभावित रहेंगी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सार्वजनिक, निजी, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के करीब 10 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। 11 सितंबर की हड़ताल के बाद इसे बैंक यूनियनों का दूसरा बड़ा कदम बताया गया है।

इस हड़ताल को ऑल इंडिया रिजर्व बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIRBEA) और ऑल इंडिया रिजर्व बैंक वर्कर्स फेडरेशन (AIRBWF) ने भी समर्थन दिया है। दोनों संगठनों ने 28 सितंबर को लंच टाइम के दौरान पोस्टर और प्लेकार्ड के साथ गेट प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
5 दिन के कार्य सप्ताह की मांग…
बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन काम करने की है। यूनियनों के अनुसार, इस मुद्दे पर दिसंबर 2023 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और UFBU के बीच सहमति बन चुकी थी। इसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय भेजा गया था।
यूनियनों का कहना है कि मार्च 2025 में मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) के समक्ष वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के संयुक्त सचिव ने बताया था कि इस मुद्दे पर मंत्रालय के उच्च स्तर पर विचार चल रहा है और जल्द फैसला लिया जाएगा। हालांकि, अब तक निर्णय नहीं हुआ है।
यूनियनों का कहना है कि पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू होने के बाद भी बैंक कर्मचारियों के काम के घंटों को इस तरह व्यवस्थित किया जा सकता है कि ग्राहकों को सेवा समय में परेशानी न हो।
PLI को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी
यूनियनों ने प्रॉफिट लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI के वितरण को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि स्केल IV से VIII के उच्च अधिकारियों को, जो कुल कर्मचारियों के 5 प्रतिशत से भी कम हैं, 365 दिनों के वेतन के बराबर इंसेंटिव दिया जा रहा है।
वहीं, यूनियनों का दावा है कि बाकी करीब 95% कर्मचारियों को 15 दिन या उससे कम का इंसेंटिव दिया जा रहा है। उनका कहना है कि बैंक का मुनाफा कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है, इसलिए इंसेंटिव में इस तरह का अंतर कर्मचारियों में असंतोष पैदा करता है।
पेंशन और मेडिकल सुविधाओं की मांग भी शामिल
हड़ताल के पीछे कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगें भी हैं। इनमें पेंशन योजना में सुधार, पुरानी पेंशन की बहाली और पेंशन अपडेशन की मांग शामिल है।
इसके अलावा कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और स्वास्थ्य बीमा कवरेज की भी मांग की जा रही है। यूनियनों का कहना है कि बैंक मुनाफा कमा रहे हैं और सरकार को लाभांश दे रहे हैं, ऐसे में कर्मचारियों की इन मांगों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
27 सितंबर को बैंक खोलने के फैसले का विरोध
AIRBEA और AIRBWF ने 27 सितंबर, रविवार को बैंक खोलने के फैसले पर भी आपत्ति जताई है। दोनों संगठनों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक को नियामक की भूमिका निभाते हुए सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालना चाहिए।
यूनियनों ने आरोप लगाया है कि आरबीआई कर्मचारियों के हितों के खिलाफ सरकार के दबाव में काम कर रहा है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
27 सितंबर को रविवार होने के बावजूद बैंक खोलने का फैसला किया गया है, लेकिन यूनियनों का विरोध जारी है। इसके बाद 28, 29 और 30 सितंबर को हड़ताल प्रस्तावित है। ऐसे में बैंकिंग सेवाएं लगातार प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।
हड़ताल के दौरान कैश जमा और निकासी, चेक क्लीयरेंस और ड्राफ्ट से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं। वहीं ऑनलाइन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चालू रहने की संभावना है।
यूनियनों ने कहा है कि वे अपनी लंबित मांगों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर एकजुट होकर हड़ताल कर रहे हैं।
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