महिलाएं चाहे पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ कोई भी कहीं सुरक्षित नहीं है। ज़रा सोचिए स्कूल को बच्चों के लिए शिक्षा और संस्कार का केंद्र माना जाता है। ऐसे में जब किसी शिक्षण संस्थान में ही शिक्षक और प्रबंधन के बीच विवाद सामने आए तो कई सवाल खड़े होते हैं। ऐसी ही एक खबर रामगढ़ के बरकाकाना स्थित DAV पब्लिक स्कूल से सामने आई है, जहां CCL NTS की हिंदी शिक्षिका स्वीटी झा और स्कूल के प्राचार्य के बीच विवाद अब कानूनी नोटिस तक पहुंच गया है। हिंदी शिक्षिका स्वीटी झा ने स्कूल के प्राचार्य के ऊपर अमर्यादित व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न को लेकर DAV कॉलेज प्रबंध समिति (DAV CMC) में शिकायत की है। वहीं, प्राचार्य की ओर से जारी कानूनी नोटिस में शिक्षिका से लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य और विस्तृत जानकारी मांगी गई है। नोटिस में आरोपों के गलत या निराधार पाए जाने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के साथ ₹1 करोड़ मुआवजे का दावा करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है।
13 जुलाई को दी थी शिकायत
शिक्षिका के अनुसार, उन्होंने 13 जुलाई 2026 को DAV स्कूल प्रबंध समिति के समक्ष प्राचार्य के कथित व्यवहार को लेकर लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद DAV बरियातू के प्राचार्य सहायक क्षेत्रीय अधिकारी संजय कुमार मिश्रा विद्यालय पहुंचे और मामले की जानकारी ली। शिक्षिका का कहना है कि जांच के दौरान उन्होंने अपने आरोपों और उनसे जुड़ी परिस्थितियों को अधिकारियों के सामने विस्तार से रखा।
शिकायत के बाद मामले की जांच प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। शिक्षिका ने अपने पत्र में बताया कि जांच समिति के समक्ष उन्होंने अपना पक्ष रखा और संबंधित गवाहों ने भी अपनी गवाही दर्ज कराई। उनका दावा है कि विद्यालय के कुछ वरिष्ठ शिक्षकों ने भी प्राचार्य के कथित व्यवहार से जुड़ी जानकारी जांच समिति के समक्ष दी।
शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप
शिक्षिका ने आरोप लगाया कि मामला DAV प्रबंधन के समक्ष विचाराधीन रहने के दौरान ही उन्हें विद्यालय के लेटरपैड पर कानूनी नोटिस जारी किया गया। उनका दावा है कि उन्हें अपनी शिकायत वापस लेने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा। शिक्षिका के पत्र के अनुसार, उन्हें स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे गए नोटिस में कानूनी प्रक्रिया और मानहानि के मुकदमे की चेतावनी दी गई। उन्होंने कहा कि इससे वह मानसिक दबाव में आ गईं और उनके निजी तथा पारिवारिक जीवन पर भी असर पड़ा।
नोटिस में दो कार्यदिवस में मांगा गया जवाब
प्राचार्य की ओर से जारी नोटिस में शिक्षिका से प्रत्येक आरोप के संबंध में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है। इसमें कथित घटना की तारीख, समय और स्थान, संभावित गवाहों की जानकारी तथा दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, संदेश, ऑडियो-वीडियो या अन्य संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की गई है। नोटिस में इसके लिए दो कार्यदिवस का समय निर्धारित किया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि में आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं या आरोप गलत, निराधार अथवा दुर्भावनापूर्ण पाए जाते हैं, तो प्राचार्य उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें दीवानी मानहानि, लागू कानूनों के तहत आपराधिक कार्रवाई और संबंधित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष कार्यवाही का उल्लेख है।
इसके अलावा नोटिस में ₹1 करोड़ के मुआवजे का दावा करने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है। इसमें प्रतिष्ठा को नुकसान, मानसिक पीड़ा, भावनात्मक परेशानी, पेशेवर नुकसान, मुकदमेबाजी खर्च और अधिवक्ता शुल्क जैसी क्षतियों का उल्लेख किया गया है।
शिक्षिका ने भेजा नोटिस का जवाब
शिक्षिका ने बताया है कि उन्होंने कानूनी नोटिस का लिखित जवाब ईमेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज दिया है। उन्होंने DAV कॉलेज प्रबंध समिति से पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि वह बिना किसी भय या दबाव के विद्यालय में अपना काम करना चाहती हैं।
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