Wednesday, October 14

दिल्ली समेत देश के विभिन्न शहरों में सड़क किनारे लगने वाली खाने-पीने की दुकानों पर गरमा-गरम समोसे, कचौड़ी, पकौड़ी और अन्य स्वादिष्ट पकवानों को अखबार में लपेटकर देना एक आम बात है। बारिश के मौसम में इन तले हुए व्यंजनों का आनंद लेने वालों की भीड़ कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस अखबार में लिपटा भोजन आप बड़े चाव से खा रहे हैं, वह आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अखबार में लिपटा भोजन धीरे-धीरे आपको कई गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में धकेल सकता है, जिसमें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी शामिल है।

अखबार में लिपटा भोजन: क्यों है यह खतरनाक?

यह सिर्फ एक पुरानी आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है। जब कोई गर्म या तेलयुक्त खाद्य पदार्थ सीधे अखबार के संपर्क में आता है, तो छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही और उसमें मौजूद हानिकारक रसायन आसानी से भोजन में घुलने लगते हैं। नेशनल फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) जैसी संस्थाएं भी लंबे समय से खाद्य पदार्थों को अखबार में पैक करने से बचने की सख्त सलाह दे रही हैं। एफएसएसएआई की वेबसाइट पर जारी कई दिशा-निर्देशों में इस बात पर जोर दिया गया है कि अखबार में भोजन पैक करना उपभोक्ता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

सिर्फ स्याही ही नहीं, बैक्टीरिया भी हैं दुश्मन!

विशेषज्ञों का कहना है कि यह खतरा केवल स्याही तक ही सीमित नहीं है। अखबार छपाई की मशीन से लेकर वितरण और फिर बिक्री तक, अनगिनत हाथों और दूषित सतहों के संपर्क में आता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उस पर हानिकारक बैक्टीरिया, धूल, मिट्टी और अन्य सूक्ष्मजीव जमा हो जाते हैं। जब ऐसा दूषित कागज सीधे भोजन के संपर्क में आता है, खासकर जब भोजन गर्म या नम हो, तो ये रोगाणु तेजी से भोजन में स्थानांतरित हो सकते हैं। इससे संक्रमण, पेट संबंधी बीमारियां जैसे दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कल्पना कीजिए, कितनी गंदगी आपके पेट में जा रही है, जब आप सोचते हैं कि आप बस एक समोसा खा रहे हैं!

जहरीली भारी धातुएं और उनके घातक प्रभाव

अखबार की स्याही में लेड (सीसा), क्रोमियम, कैडमियम और थैलेट्स (phthalates) जैसी अत्यंत विषैली भारी धातुएं और रसायन मौजूद हो सकते हैं। ये तत्व मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक होते हैं:

  • लेड (सीसा): यह एक न्यूरोटॉक्सिन है, जो तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क और गुर्दों को नुकसान पहुंचा सकता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक है, क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है।
  • क्रोमियम और कैडमियम: इन धातुओं का लंबे समय तक सेवन लीवर और किडनी को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है। कुछ अध्ययनों ने इन्हें कुछ प्रकार के कैंसर के बढ़ते जोखिम से भी जोड़ा है।
  • थैलेट्स: ये रसायन हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे कागज में रखा भोजन खाता है, तो ये हानिकारक तत्व धीरे-धीरे शरीर में जमा होने लगते हैं। समय के साथ इनकी मात्रा बढ़ने पर लीवर, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं, जिससे गंभीर और लाइलाज बीमारियां हो सकती हैं। यह एक धीमी गति का जहर है, जिसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन भीतर ही भीतर शरीर को खोखला करता रहता है।

गर्म और तैलीय भोजन बढ़ाता है जोखिम

यह जानलेवा खतरा तब और ज्यादा बढ़ जाता है, जब भोजन गर्म, तैलीय या नम होता है। अधिक तेल या नमी वाले खाद्य पदार्थ स्याही में मौजूद रासायनिक तत्वों को बहुत तेजी से भोजन में स्थानांतरित कर सकते हैं। गर्मी और नमी रसायनों को सक्रिय करती है और उन्हें भोजन के कणों में घुलने में मदद करती है। कई बार भोजन और कागज के बीच मौजूद भाप की नमी भी इन भारी धातुओं को खाने तक पहुंचाने का मुख्य माध्यम बन जाती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी भी प्रकार के गर्म या तैलीय खाद्य पदार्थ को अखबार या सामान्य छपाई वाले कागज में रखने से बचने की कड़ी हिदायत देते हैं। आप सोचिए, गरमा-गरम कचौड़ी का स्वाद लेने के लिए आप कितनी बड़ी कीमत चुका सकते हैं।

सुरक्षित विकल्प क्या हैं?

तो फिर, क्या करें? विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन की सुरक्षित पैकेजिंग के लिए कई बेहतर और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें अपनाना चाहिए। इनमें शामिल हैं:

  • फूड-ग्रेड बटर पेपर: यह विशेष रूप से भोजन के लिए डिज़ाइन किया गया होता है और इसमें कोई हानिकारक रसायन नहीं होते।
  • प्रमाणित फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री: बाजार में कई ऐसी पैकेजिंग सामग्री उपलब्ध है जो खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करती है।
  • पारंपरिक केले के पत्ते: सदियों से भारत में केले के पत्तों का उपयोग भोजन परोसने और पैक करने के लिए किया जाता रहा है, जो पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित हैं।

यदि किसी कारणवश अखबार या किसी अन्य बाहरी कागज का इस्तेमाल करना जरूरी हो, तो भोजन और कागज के बीच बटर पेपर या केले का पत्ता अवश्य रखा जाना चाहिए। इससे भोजन का सीधा संपर्क अखबार की जहरीली स्याही से नहीं होगा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम काफी हद तक कम किए जा सकते हैं। अपनी और अपनों की सेहत का ध्यान रखना हमारी पहली जिम्मेदारी है। अगली बार जब आप सड़क किनारे कुछ खाने का मन करें, तो यह सुनिश्चित करें कि आपका स्वादिष्ट भोजन सुरक्षित तरीके से पैक किया गया हो, न कि अखबार में लिपटा भोजन के रूप में, जो आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। जागरूकता ही बचाव है!

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