Monday, September 21

हमारे शरीर की छन्नी यानी किडनी लगातार खून की सफाई करती है, ताकि शरीर की गंदगी पेशाब के रास्ते बाहर निकलती रहे। लेकिन कई बार किडनी काम करना बंद कर देती है, जिसे किडनी फेल होना कहते हैं। ऐसे में शरीर की गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और अंदर ही अंदर जमा होने लगती है, जिससे शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। इससे कई बार जान जाने का खतरा भी हो सकता है। कभी-कभी किडनी फेलियर अचानक होता है तो कभी यह धीरे-धीरे बढ़ता है।

किडनी फेलियर का खतरा बढ़ाने वाली आम बीमारियां

विशेषज्ञ के मुताबिक, कुछ सामान्य बीमारियां किडनी फेलियर का खतरा बढ़ा देती हैं। इनमें डायबिटीज़, हाई बीपी, क्रोनिक ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस, पॉलीसिस्टिक किडनी डिज़ीज़, यूरिन इंफेक्शन और हाई यूरिक एसिड शामिल हैं।

किडनी की बीमारी के शुरुआती संकेत क्या हैं

डॉक्टर के मुताबिक, किडनी की बीमारी की शुरुआत में अक्सर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन किडनी फंक्शन टेस्ट, यूरिन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से किडनी की दिक्कत का पता लगाया जा सकता है। किडनी की बीमारी के लक्षण सामान्य होते हैं, इसलिए लोग अक्सर उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इनमें भूख कम लगना, उल्टी आना, थकान रहना, कमज़ोरी लगना, खुजली होना, आंखों और पैरों में सूजन तथा सांस फूलना शामिल है। बीमारी गंभीर होने पर मरीज़ को दौरे पड़ सकते हैं और वह बेहोशी की अवस्था में भी जा सकता है। इसलिए शुरुआती स्टेज में किडनी की बीमारी का पता लगाने के लिए नियमित जांच कराना जरूरी है।

किडनी फेलियर का रिस्क कैसे घटाएं

डॉक्टर के मुताबिक, अगर डायबिटीज़ है तो शुगर को कंट्रोल में रखें। हाई ब्लड प्रेशर है तो नियमित रूप से जांच कराते रहें और इसे नियंत्रण में रखें। खाने में नमक की मात्रा कम रखें और हाई प्रोटीन वाली चीज़ें बहुत ज़्यादा खाने से बचें, क्योंकि इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। रोज़ एक्सरसाइज़, योग, मेडिटेशन और वॉकिंग जैसी एक्टिविटीज़ करनी चाहिए। इसके अलावा सिगरेट और शराब का सेवन न करें, हाई फैट वाली चीज़ें कम खाएं और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें। इन आदतों को अपनाकर किडनी की बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और सलाह विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित हैं। किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। खुद से कोई दवा लेने से बचें।

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