गिरिडीह/बोकारो। गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के सांसद चन्द्र प्रकाश चौधरी ने दुगदा कोल वाशरी क्षेत्र में विस्थापित रैयतों के साथ हो रही कथित मारपीट और प्रबंधन की मनमानी को लेकर बोकारो जिला प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखा है।
पत्र का विवरण
सांसद कार्यालय से जारी पत्र (पत्रांक 1323/2026-27, दिनांक 12/07/2026) बोकारो के उपायुक्त को संबोधित है। पत्र का विषय है — “दुगदा कोल वाशरी के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के नियम विरुद्ध गलत तरीके से रैयतों को विस्थापित करते हुए मारपीट की घटना के संबंध में, 10/07/2026 को विस्थापित रैयतों द्वारा सौंपे गए आवेदन/अभ्यावेदन पर कार्रवाई की प्रार्थना।”
पत्र में सांसद ने पूर्व में जारी अपने पत्रों तथा पुराने भूमि दस्तावेजों (जिनमें विभिन्न तिथियों के निबंधन/निर्धारण संबंधी उल्लेख शामिल हैं) का हवाला देते हुए कहा है कि हाल में प्राप्त सूचना के अनुसार निर्णय के विरुद्ध बिना पूर्व सूचना के अवैध रूप से रैयतों की भूमि अधिग्रहण कर विस्थापितों के वैधानिक अधिकार छीनने का प्रयास हो रहा है, जिसके चलते मारपीट और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है, साथ ही झूठे मुकदमे दर्ज कर डराने-धमकाने की शिकायतें भी मिली हैं।
पत्र के अनुसार 18/07/2026 को विस्थापित रैयतों द्वारा उक्त मामले में आवेदन एवं मांगों के निवारण, भूमि की बहाली, पुनर्वास आदि के संबंध में दुखी एवं आहत होकर प्रशासन से समुचित कार्रवाई की प्रार्थना की जा रही है, जिसमें गैर-कानूनी रूप से समिति के भूमि सभी विस्थापित रैयतों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का उल्लेख है।
सांसद ने यह भी लिखा है कि निजी प्रबंधन की विधि-व्यवस्था पर कोई उचित नियंत्रण न होने के कारण उन्होंने यह पत्र जिला प्रशासन की व्यवस्था हेतु प्रेषित किया है।
प्रतिलिपि किन्हें भेजी गई
पत्र की प्रतिलिपि निम्नलिखित अधिकारियों को भेजी गई है:
- पुलिस अधीक्षक, बोकारो
- पुलिस उपाधीक्षक, चास, बोकारो
- अनुमंडल पदाधिकारी, चास
- अंचल प्रभारी, दुगदा वासरी, चास
- थाना प्रभारी, चास, बोकारो
18 जुलाई को प्रदर्शन का ऐलान
पोस्टर में सांसद चौधरी ने घोषणा की है कि आगामी 18 जुलाई को मेन गेट पर विस्थापित रैयत समिति के बैनर तले आयोजित होने वाले “जन-आक्रोश शक्ति प्रदर्शन” का वे समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा है कि इसकी लिखित जानकारी वे बोकारो जिला प्रशासन को दे रहे हैं।
पोस्टर में आरोप लगाया गया है कि रैयत विस्थापितों की हक-अधिकार की मांग पर प्रबंधन द्वारा मनमानी और मारपीट-दुर्व्यवहार करने की लिखित सूचना मिलने के बाद सांसद ने यह कदम उठाया है।
