Friday, November 6

रांची: झारखंड की राजधानी रांची का मोरहाबादी मैदान रविवार को आदिवासी एकता के बड़े जुटान का गवाह बना। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। कार्यक्रम में आदिवासी हितों से जुड़े कई अहम मुद्दों के साथ प्रस्तावित परिसीमन को लेकर भी जोरदार आवाज उठी।

इस महाजुटान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी आमंत्रित किया गया था। हालांकि, सीएम खुद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनकी जगह झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक विकास कुमार मुंडा मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर महाजुटान में पहुंचे। उनकी मौजूदगी को राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

हेमंत की गैरमौजूदगी, विकास मुंडा की मौजूदगी बनी चर्चा

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में नहीं पहुंचने के बावजूद उनके प्रतिनिधि के तौर पर विकास मुंडा का शामिल होना महाजुटान में झामुमो की मौजूदगी को दर्शाता है। खास बात यह है कि आयोजन का प्रमुख मुद्दा ही आदिवासी अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रस्तावित परिसीमन रहा।

ऐसे में सीएम की ओर से अपने प्रतिनिधि को भेजे जाने को आदिवासी समाज के इस बड़े आयोजन के प्रति सरकार की राजनीतिक मौजूदगी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

बंधु तिर्की के नेतृत्व में बड़ा जुटान

पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों समेत बड़ी संख्या में लोग महाजुटान का हिस्सा बने।

आयोजकों की ओर से दावा किया गया कि कार्यक्रम में लाखों की संख्या में लोग पहुंचे। मोरहाबादी मैदान में लोगों की बड़ी मौजूदगी ने इसे एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक जुटान का रूप दे दिया।

परिसीमन को लेकर सबसे ज्यादा चिंता

महाजुटान में प्रस्तावित परिसीमन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। मंच से वक्ताओं ने आशंका जताई कि यदि भविष्य में केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो इसका असर झारखंड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है।

नेताओं ने कहा कि झारखंड की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं। इसलिए यहां परिसीमन करते समय सिर्फ जनसंख्या के आंकड़ों को आधार बनाना उचित नहीं होगा।

‘सिर्फ जनसंख्या के आधार पर न हो परिसीमन’

बंधु तिर्की समेत महाजुटान में शामिल अन्य नेताओं ने परिसीमन के दौरान आदिवासी बहुल क्षेत्रों की परिस्थितियों, ऐतिहासिक विस्थापन और संविधान में दिए गए विशेष प्रावधानों को ध्यान में रखने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह राज्य के सामाजिक और संवैधानिक ढांचे से भी जुड़ा हुआ है।

CNT-SPT से पांचवीं अनुसूची तक मुद्दे उठे

महाजुटान के मंच से सिर्फ परिसीमन ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। CNT-SPT एक्ट, MMDR संशोधन बिल, पांचवीं अनुसूची, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषयों को लेकर नेताओं ने अपनी बात रखी।

वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा की जरूरत पर जोर दिया।

केंद्र सरकार की नीतियों पर भी निशाना

महाजुटान के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर भी वक्ताओं ने सवाल उठाए। नेताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों और अधिकारों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।

मंच से कहा गया कि जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समाज को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।

विकास मुंडा के पहुंचने से क्या संदेश?

पूरे आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गैरमौजूदगी और उनकी जगह विकास कुमार मुंडा के पहुंचने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में रही। विकास मुंडा ने महाजुटान में शामिल होकर झामुमो की उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं बंधु तिर्की के नेतृत्व में जुटी बड़ी भीड़ ने कांग्रेस और आदिवासी संगठनों की राजनीतिक सक्रियता को भी सामने रखा।

अब महाजुटान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिसीमन और आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे झारखंड की राजनीति को आगे किस दिशा में ले जाते हैं। खासकर आने वाले समय में इन मुद्दों पर सरकार, विपक्ष और आदिवासी संगठनों की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।

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