रांची: त्योहारी सीजन में व्यापारियों को राहत देने और बाजारों में माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने वित्त एवं वाणिज्यकर मंत्री राधाकृष्ण किशोर से मुलाकात की। शनिवार, 10 अक्टूबर को हुई इस मुलाकात में चैंबर ने बाजार क्षेत्रों में मालवाहक वाहनों को रोककर परमिट और ई-वे बिल की जांच करने तथा तकनीकी कमियों के आधार पर कार्रवाई किए जाने से व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठाया। चैंबर की मांग पर मंत्री ने वाणिज्यकर विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि शहर के अंदर वाहनों की आवाजाही बाधित नहीं की जाए, ताकि त्योहारों के दौरान व्यापार सुचारु रूप से चलता रहे।
परमिट और ई-वे बिल जांच से व्यापार प्रभावित होने की चिंता
चैंबर प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि त्योहारों के दौरान बाजारों में माल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में मालवाहक वाहनों को रोकने या जब्ती जैसी दंडात्मक कार्रवाई से दुकानों तक सामान पहुंचाने में परेशानी हो सकती है। इससे आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने के साथ व्यापारियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने आग्रह किया कि त्योहारी अवधि को ध्यान में रखते हुए बाजार क्षेत्रों में परमिट और ई-वे बिल जांच के नाम पर वाहनों को रोकने तथा जब्ती जैसी कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए विभागीय निर्देश जारी किए जाएं।
इस पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वाणिज्यकर विभाग के सचिव को निर्देशित किया कि शहर के अंदर वाहनों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए। इसका उद्देश्य बाजारों में व्यापारिक गतिविधियों को निर्बाध बनाए रखना और त्योहारों के दौरान माल की आपूर्ति में अनावश्यक रुकावट से बचना है।
व्यापारियों से सही इनवॉइस जारी करने की अपील
बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ व्यवसायी उचित इनवॉइस जारी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने व्यापार जगत से इस मामले में गंभीरता बरतने और निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की।
मंत्री के इस रुख से स्पष्ट है कि सरकार एक ओर व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कर अनुपालन और सही बिलिंग व्यवस्था को भी जरूरी मानती है। ऐसे में व्यापारियों को माल की आवाजाही के दौरान जरूरी दस्तावेजों और बिलिंग संबंधी नियमों का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी।
वाणिज्यकर सर्किलों में खाली पदों से व्यापारियों को परेशानी
मुलाकात के दौरान चैंबर ने वाणिज्यकर विभाग के विभिन्न सर्किल कार्यालयों में संयुक्त आयुक्त के पद रिक्त रहने का मुद्दा भी उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण कई महत्वपूर्ण वैधानिक और प्रशासनिक कार्य लंबित हो रहे हैं, जिससे कारोबारियों को बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पूर्व अध्यक्ष रंजीत गाड़ोदिया तथा सदस्य आदित्य शाह और ज्योति पोद्दार ने बताया कि विशेष रूप से झारखंड वैट के दायरे में आने वाले पेट्रोलियम उत्पादों, शराब और अन्य गैर-जीएसटी वस्तुओं का कारोबार करने वाले व्यवसायियों को कठिनाइयां हो रही हैं।
इन कारोबारियों को नए जेवैट और सीएसटी पंजीकरण, पंजीकरण में संशोधन, वस्तुओं को जोड़ने या हटाने, व्यावसायिक पते और नए गोदाम की जानकारी अपडेट कराने तथा आवश्यक वैधानिक फॉर्म प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
खाली पद भरने और वरिष्ठ अधिकारियों को शक्ति देने की मांग
चैंबर महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि अधिकारियों के पद रिक्त रहने से पंजीकरण, संशोधन और आवश्यक फॉर्म जारी करने जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। इसका असर केवल व्यापारियों के कामकाज पर ही नहीं, बल्कि राज्य के राजस्व पर भी पड़ सकता है।
चैंबर ने मांग की कि रिक्त सर्किल कार्यालयों में जल्द से जल्द संयुक्त आयुक्तों की नियुक्ति की जाए। जब तक नियमित पदस्थापना नहीं होती, तब तक संबंधित सर्किल में कार्यरत वरिष्ठतम अधिकारी को आवश्यक प्रशासनिक शक्तियां अस्थायी रूप से देने पर विचार किया जाए, ताकि लंबित मामलों का समय पर निपटारा हो सके।
वित्त मंत्री ने इस मामले में भी जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
छठ पूजा के बाद होगी संयुक्त बैठक
मंत्री ने भरोसा दिलाया कि आगामी छठ पूजा के बाद वित्त एवं वाणिज्यकर विभाग के सचिव, विभागीय अधिकारियों और झारखंड चैंबर के पदाधिकारियों के बीच संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें विभाग से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल, उपाध्यक्ष विकास विजयवर्गीय, महासचिव रोहित अग्रवाल, सह सचिव अमित शर्मा और पूजा ढाढा, कोषाध्यक्ष नवजोत अलंग, पूर्व अध्यक्ष रंजीत गाड़ोदिया तथा सदस्य आदित्य शाह, ज्योति पोद्दार और कुमुद झा शामिल थे।
त्योहारी सीजन में वाहनों की आवाजाही सुचारु रखने और वाणिज्यकर कार्यालयों में लंबित कार्यों के समाधान को लेकर हुई यह मुलाकात व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब विभागीय निर्देशों के क्रियान्वयन और रिक्त पदों पर निर्णय से कारोबारियों को कितनी राहत मिलती है, इस पर नजर रहेगी।
