नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से 624 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद भी संकट पूरी तरह टला नहीं है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आपदा के दौरान मलबा जमा होने से बनी एक झील को लेकर अब अचानक दूसरी बाढ़ का खतरा जताया गया है। चीन ने नेपाल को सतर्क करते हुए कहा है कि झील का पानी कभी भी बाहर निकल सकता है, जिससे निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।
चीन की ओर से जारी चेतावनी के मुताबिक, करीब दो दिन पहले बनी इस झील के पानी का रंग धीरे-धीरे गाढ़ा होता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पानी के रंग में यह बदलाव झील के संभावित खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इससे पहले 28 अगस्त को भी चीन ने अलर्ट जारी किया था, जिसके बाद चीन और नेपाल ने इलाके में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को रोक दिया था।
0.11 वर्ग किलोमीटर में फैली है झील
नेपाल नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस झील की सैटेलाइट तस्वीर साझा की है। एजेंसी के मुताबिक, यह झील रसुवा गढ़ी बॉर्डर से करीब 18 किलोमीटर दूर बनी है और करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। आसपास रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बताया गया है कि नेपाल में आई बाढ़ के बाद बड़ी मात्रा में जमा हुए मलबे की वजह से नेपाल-तिब्बत सीमा पर यह झील बनी। इसमें अब तक करीब 25 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा होने की जानकारी है।
यह झील चीन की तरफ बहने वाली छोछेन खोला नदी और नेपाल में बहने वाली पुरेपु त्सांगपो नदी के संगम के पास बनी है। चीन के वाटर रिसोर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक, झील में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
झील फटी तो कितना बड़ा होगा खतरा?
चीन अब मॉडल के जरिए यह आकलन करने में जुटा है कि अगर झील अचानक फटती है तो पानी का बहाव कितना तेज हो सकता है और इसका असर किन इलाकों तक पहुंच सकता है।
अब तक के आकलन के अनुसार, चीन का अनुमान है कि पानी का बहाव 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड से ज्यादा नहीं होगा। इसका मतलब है कि पानी के नदी के किनारों के भीतर ही सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, झील के पानी में लगातार बढ़ोतरी के कारण निगरानी जारी रखी जा रही है।
28 अगस्त को भी जारी हुआ था अलर्ट
चीन ने 28 अगस्त को जानकारी दी थी कि झील का पानी ओवरफ्लो होकर त्रिशूली नदी और लहंडे खोला नदी में गिर रहा है। इसके बाद चीनी ब्रॉडकास्टर CCTV ने बताया था कि स्थिति से पैदा होने वाले जोखिम को मैनेज कर लिया गया है।
इसके बावजूद चीन इलाके पर लगातार नजर बनाए हुए है। इसके लिए सैटेलाइट और ड्रोन की मदद ली जा रही है, ताकि झील के पानी के स्तर और आसपास की स्थिति में होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सके।
नेपाल पहले ही भीषण बाढ़ और भूस्खलन की तबाही झेल चुका है। अब सीमा पर बनी इस झील ने एक और चिंता खड़ी कर दी है। अगर झील का पानी अचानक बाहर निकलता है, तो निचले इलाकों में एक और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल चीन और नेपाल की एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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