भारत में ड्रग तस्करी के खिलाफ जांच अब सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है। विदेशों में बैठकर भारत में नशीले पदार्थों का नेटवर्क चलाने वाले कथित तस्करों तक पहुंचने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ शुरू किया है। इस अभियान का मकसद विदेशों में मौजूद ऐसे ड्रग नेटवर्क और उनके प्रमुख आरोपियों तक पहुंचना है, जो भारत में तस्करी से जुड़े मामलों में वांछित हैं।
आखिर क्या है ऑपरेशन ग्लोबल-हंट?
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट को NCB की तीन साल की रणनीतिक मुहिम के तौर पर तैयार किया गया है। इसके तहत विदेशों में सक्रिय भारतीय ड्रग नेटवर्कों को निशाना बनाया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अभियान के तहत करीब 100 ड्रग नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। इन नेटवर्कों के संचालन से जुड़े लोगों के ठिकाने दुबई, कनाडा और यूरोप समेत अलग-अलग देशों में बताए गए हैं।
इसका मतलब सिर्फ किसी एक तस्कर को गिरफ्तार करना नहीं है। जांच का फोकस नेटवर्क के पूरे ढांचे तक पहुंचने पर है – कौन ड्रग की सप्लाई करता है, पैसा कहां से आता है, भारत में कौन लोग जुड़े हैं और विदेशों में बैठे ऑपरेटर किस तरह पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करते हैं।
कैसे काम करता है यह ऑपरेशन?
इस अभियान में भारतीय एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती हैं। इंटरपोल रेड नोटिस, संदिग्धों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश, विदेशी एजेंसियों से सूचना साझा करना और उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए आरोपियों को भारत वापस लाना इसका अहम हिस्सा है। कुछ मामलों में आरोपियों की भारत में मौजूद संपत्तियों पर कार्रवाई और वित्तीय नेटवर्क की जांच भी की जाती है।
यानी कोई आरोपी देश छोड़कर विदेश में बैठ जाए, तो जांच वहीं खत्म नहीं होती। उसकी लोकेशन, संपर्क, वित्तीय लेनदेन और ड्रग नेटवर्क से जुड़े तारों को ट्रैक कर उसे भारतीय जांच के दायरे में लाने की कोशिश की जाती है।
पहला बड़ा एक्शन: मोहम्मद सलीम डोला
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट की पहली सार्वजनिक रूप से घोषित बड़ी सफलता मोहम्मद सलीम डोला के रूप में सामने आई। NCB ने अप्रैल 2026 में उसे तुर्किये से भारत वापस लाया। उसके खिलाफ भारत के अनुरोध पर मार्च 2024 में इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ था। भारत पहुंचने के बाद उसे NCB ने हिरासत में लिया।
NCB के मुताबिक, डोला पर कई ड्रग तस्करी मामलों में कार्रवाई लंबित थी और उसके कथित नेटवर्क के तार मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप तक फैले हुए थे।
अब UAE से वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट की चर्चा एक बार फिर तेज हुई है क्योंकि वीरेंद्र सिंह बसोया को UAE से भारत वापस लाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसे जून 2026 में इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर UAE में पकड़ा गया था और बाद में भारतीय एजेंसियों के समन्वय से भारत लाया गया।
बसोया का नाम मेफेड्रोन और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों की जांच में सामने आया है। उसके खिलाफ हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि ग्लोबल-हंट का फोकस सिर्फ छोटे स्तर के तस्करों पर नहीं, बल्कि विदेशों से नेटवर्क संचालित करने वाले कथित प्रमुख आरोपियों तक पहुंचने पर है।

क्योंकि इस अभियान में जांच का तरीका सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। एजेंसियां विदेश में छिपे कथित सरगनाओं तक पहुंचने के साथ उनके नेटवर्क की वित्तीय और लॉजिस्टिक कड़ियों को भी तलाश रही हैं।
NCB की रणनीति में एक तरफ बड़े नेटवर्क तक पहुंचने के लिए जांच को ऊपर की ओर ले जाना और दूसरी तरफ पकड़े गए लोगों से पूछताछ के जरिए नेटवर्क के शीर्ष तक पहुंचना शामिल है। यही वजह है कि किसी एक गिरफ्तारी के बाद भी जांच आगे बढ़ सकती है और उससे जुड़े दूसरे आरोपियों तक एजेंसियां पहुंच सकती हैं।
किन ड्रग्स पर नजर?
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट के तहत निशाने पर ऐसे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क हैं, जिनका संबंध कोकीन, हेरोइन, फेंटानिल और सिंथेटिक ड्रग्स समेत विभिन्न मादक पदार्थों की तस्करी से बताया गया है।
सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए मेफेड्रोन जैसे पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच भी इस व्यापक कार्रवाई का अहम हिस्सा बन रही है।
विदेश में छिपना अब आसान नहीं
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत में दर्ज गंभीर ड्रग मामलों के आरोपी विदेश जाकर जांच से हमेशा के लिए बच नहीं सकते। इंटरपोल और विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग के जरिए उनकी तलाश आगे बढ़ाई जा सकती है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें भारत वापस लाया जा सकता है।
100 नेटवर्क का लक्ष्य और लगातार हो रही विदेशी धरपकड़ से साफ है कि NCB अब ड्रग तस्करी की लड़ाई को ‘लोकल’ नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल’ स्तर पर लड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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