
शुक्रवार को एक खबर चर्चा में रही कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सरकारी गाड़ी वापस लौटा दी है और निजी गाड़ी पर चल रहे हैं. वित्त मंत्री इनोवा हाईक्रॉस पर क्या चढ़े इस खबर ने तूल पकड़ ली. लेकिन , राज्य के वित्त मंत्री ऐसा कदम उठा सकते हैं. वो इसलिए क्योंकि झारखंड कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है . राजव में वृद्धि जरूरी है लेकिन राज्य को मिलने वाले केंद्र की सहायता राशि में लगातार गिरावट आ रही है. यही कारण है कि वित्त मंत्री ने वित्त सचिव प्रशांत कुमार को पत्र लिखकर विशेष निर्देश दिए है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि आम जनता पर अतिरिक्त टैक्स लगाए बिना राजस्व बढ़ाने की तैयारी की जाए. उन्होंने इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं.
केंद्र की NDA सरकार पर निर्भरता कम करने की रणनीति में जुटा वित्त विभाग
झारखंड सरकार का वित्त विभाग केंद्र की NDA सरकार पर निर्भरता कम करते हुए राज्य के राजस्व की वृद्धि करने की रणनीति बनाने में जुट गया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में अपने राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने और केंद्र सरकार पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़े रणनीतिक बदलाव की तैयारी की जा रही है. राज्य के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर तथा संसदीय कार्य विभाग के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस संबंध में वित्त विभाग के सचिव को एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक पत्र (पत्रांक 408/मं०को०, दिनांक 10/07/26) लिखा है. इस पत्र में उन्होंने आम जनता पर बिना कोई अतिरिक्त कर (टैक्स) थोपे, राज्य के आंतरिक स्रोतों से राजस्व बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
क्या होगा बजट का लक्ष्य और क्या है वर्तमान वित्तीय स्थिति
वित्त मंत्री द्वारा जारी पत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए झारखंड का मूल बजट 1,58,560 करोड़ रुपये निर्धारित है. इस बजट के विरुद्ध कुल राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य 1,36,210.04 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसका वर्गीकरण इस प्रकार है:
राज्य का स्वकर (Own Tax Revenue): 46,000 करोड़ रुपये
राज्य का गैर स्वकर (Non-Tax Revenue): 20,700 करोड़ रुपये
केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी: 51,236.38 करोड़ रुपये
केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि: 18,273.66 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार का नहीं मिल रहा सहयोग.. केंद्र की नीतियों और अनुदान में कमी से बढ़ा वित्तीय बोझ
पत्र में वित्त मंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राज्य में कई महत्वपूर्ण लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसके लिए भारी राजस्व की आवश्यकता है. हालांकि, केंद्र सरकार की नीतियों—विशेष रूप से माल एवं सेवा कर (GST) के युक्तिकरण और G-RAM-G योजना के कारण—झारखंड सरकार पर प्रतिवर्ष 6000 से 8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की आशंका है. इसके साथ ही, केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता अनुदान राशि की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है.
केंद्र सरकार से मिलना था 18 हजार करोड़ जबकि मिला महज 126 करोड़
केंद्र सरकार से राज्य सरकार को मिलने वाली निर्धारित राशि करीब 18,273.66 करोड़ रुपये थी जबकि 7 जुलाई 2026 तक राज्य को मात्र 126 करोड़ रुपये (जो कि कुल लक्ष्य का केवल 0.69% है) ही प्राप्त हो सके हैं.
विशेषज्ञों की टीम का करें गठन: वित्त मंत्री
आम लोगों पर टैक्स का बोझ ना पड़े और राज्य सरकार के राजस्व में भी वृद्धि हो इसके लिए वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने वित्त सचिव को विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय टीम का गठन करने के निर्देश दिए हैं. यह टीम वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर इस वित्तीय असंतुलन और केंद्र पर निर्भरता को कम करने के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित की जानी है. इस टीम में विभिन्न विभागों के अवकाश प्राप्त दक्ष (रिटायर्ड अनुभवी) व्यक्तियों और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा. यह टीम राज्य के आंतरिक स्रोतों से “स्वकर और गैर स्वकर” राजस्व को बढ़ाने के लिए अपने वैकल्पिक और व्यावहारिक सुझाव सरकार को सौंपेगी.
राजस्व बढ़ाने के लिए मंत्री ने खुद दिए दो बड़े व्यावहारिक सुझाव
वित्त मंत्री ने पत्र के माध्यम से राजस्व वृद्धि की प्रबल संभावनाओं वाले दो मुख्य क्षेत्रों की ओर सचिव का ध्यान आकर्षित किया है:
खनन एवं परिवहन विभाग का एकीकरण:
राज्य में खनन कार्य में लगे मालवाहक वाहनों की सही जांच और उनके शत-प्रतिशत निबंधन (रजिस्ट्रेशन) के लिए मंत्री ने खनन और परिवहन विभाग के एकीकरण का सुझाव दिया है. इससे टैक्स चोरी रुकेगी और राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी.
20 मिलियन टन ‘फाइन्स आयरन ओर’ का निपटारा:
जानकारी के अनुसार, झारखंड की विभिन्न कंपनियों के पास पिछले 25-30 वर्षों से लगभग 20 मिलियन टन ‘फाइन्स आयरन ओर’ डंप पड़ा हुआ है. वित्त मंत्री ने निर्देश दिया है कि यदि राज्य सरकार इसके लिए आवश्यक परमिट और GST चालान निर्गत (जारी) कर इसकी बिक्री का रास्ता साफ करती है, तो सरकार को सीधे हजारों करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होगी.
संबंधित सचिवों को सक्रिय होने की हिदायत
अनुदान की अत्यंत धीमी गति (0.69%) को देखते हुए, वित्त मंत्री ने वित्त सचिव को निर्देशित किया है कि वे केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि को समय पर हासिल करने के लिए संबंधित विभागों के सचिवों के साथ मिलकर सकारात्मक और त्वरित प्रयास करें. पत्र के अंत में मंत्री ने इस पूरे मामले पर त्वरित और सम्यक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है.


