रांची: झारखंड के युवा मुक्केबाजों ने U-15 सब-जूनियर बॉक्सिंग प्रतियोगिता में पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया, लेकिन अब उनके सामने कैश अवॉर्ड हासिल करने में एक अजीबोगरीब पेंच खड़ा हो गया है। मामला खिलाड़ियों के उपलब्धि प्रमाणपत्र से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर ऐसी त्रुटि सामने आई है, जिसे लेकर खेल निदेशालय की ओर से कैश अवॉर्ड की प्रक्रिया में परेशानी बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि पदक जीतने वाले युवा मुक्केबाजों ने अपने कैश अवॉर्ड के लिए खेल निदेशालय में प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए। इसके बाद अधिकारियों की ओर से यह आपत्ति जताई गई कि प्रमाणपत्र पर भारतीय फुटबॉल संघ के पदाधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हैं।
यहीं से पूरा मामला और हैरान करने वाला हो जाता है। जिस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और पदक जीते, वह बॉक्सिंग प्रतियोगिता है। ऐसे में खिलाड़ियों के प्रमाणपत्र पर फुटबॉल संघ के पदाधिकारियों के हस्ताक्षर क्यों और कैसे होंगे, यह सवाल अब उठ रहा है।
बॉक्सिंग खिलाड़ी फुटबॉल संघ का हस्ताक्षर कहां से लाएं?
मामले को लेकर खिलाड़ियों और उनके परिजनों की परेशानी यह है कि अगर प्रमाणपत्र में विभागीय स्तर पर कोई गलती हुई है, तो उसे सुधारने की जिम्मेदारी संबंधित व्यवस्था की होनी चाहिए। लेकिन खिलाड़ियों से ऐसे हस्ताक्षर की अपेक्षा करना, जो उनके खेल से संबंधित ही नहीं हैं, सवाल खड़े करता है।
युवा खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने प्रतियोगिता में मेहनत कर पदक हासिल किया है और सरकार की ओर से निर्धारित प्रोत्साहन राशि पाने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा किए हैं। अब प्रमाणपत्र में मौजूद कथित त्रुटि के कारण कैश अवॉर्ड की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
‘कॉपी-पेस्ट’ और ‘टाइपो एरर’ पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस कथित गलती को लेकर है, जिसमें बॉक्सिंग प्रतियोगिता के प्रमाणपत्र पर फुटबॉल संघ से जुड़े हस्ताक्षर की बात सामने आ रही है। इसे लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या यह कॉपी-पेस्ट की गलती है या फिर टाइपो एरर?
अगर दस्तावेज तैयार करने के दौरान ऐसी गलती हुई है, तो इसका खामियाजा पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को क्यों भुगतना पड़े—यह सवाल भी उठ रहा है।
युवा मुक्केबाजों ने प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा साबित कर पदक जीते हैं। अब उनकी मांग है कि प्रमाणपत्र में हुई त्रुटि को विभागीय स्तर पर जल्द सुधारा जाए और उन्हें नियमानुसार मिलने वाला कैश अवॉर्ड बिना अनावश्यक परेशानी के उपलब्ध कराया जाए।
फिलहाल मामला प्रमाणपत्र में दर्ज विवरण और उसके आधार पर उठाई गई आपत्ति के बीच फंसा हुआ है। खिलाड़ियों के लिए सवाल यही है कि बॉक्सिंग में पदक जीतने के बाद कैश अवॉर्ड पाने के लिए आखिर फुटबॉल संघ का हस्ताक्षर कहां से लाया जाए?


