रांची: झारखंड के प्रधान महालेखाकार कार्यालय की ओर से मंगलवार को विभिन्न विभागों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्षों को लेकर प्रेस वार्ता की गई। प्रधान महालेखाकार लेखा परीक्षा इंदु अग्रवाल ने परिवहन विभाग, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, मनरेगा, झारखंड जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और राजस्व प्रतिवेदन से संबंधित सैंपल जांच की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि इन योजनाओं और विभागों के कामकाज की राज्य के छह अलग-अलग जिलों में सैंपल जांच की गई। जांच के दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन, राशि के उपयोग, लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने, दस्तावेजों के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को देखा गया।
PMAY-G में 55 से 83 फीसदी तक राशि खर्च
प्रधान महालेखाकार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। इस अवधि में योजना के तहत 55 से 83 प्रतिशत तक राशि खर्च किए जाने की जानकारी ऑडिट में सामने आई।
वहीं, 2022 से 2024 के दौरान झारखंड के कई जिलों में सामाजिक लेखा परीक्षा नहीं होने की बात भी सामने आई। इसके कारण योजनाओं में होने वाली संभावित अनियमितताओं की पहचान और लाभार्थियों को आवास निर्माण के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही गई।
मनरेगा में प्रस्तावित कार्यों में बड़ी संख्या अधूरे
मनरेगा के क्रियान्वयन को लेकर ऑडिट में कई कमियां सामने आने की जानकारी दी गई। जांच में सर्वेक्षण नहीं करने, अनुमानित और वास्तविक मानव दिवस में अंतर तथा जॉब कार्ड जारी करने और उन्हें अधिकतम करने की प्रक्रिया में कमियां पाई गईं।
ऑडिट के अनुसार, 2019 से 2024 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में से केवल 27 प्रतिशत कार्य ही पूरे हुए। वहीं, मार्च 2024 तक 49 प्रतिशत कार्य अधूरे पाए गए।
मास्टर रोल में भी मिली अनियमितता
सैंपल सर्वे के दौरान मनरेगा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच की गई। इसमें मास्टर रोल जैसे दस्तावेजों को तैयार करने और लिखने में अनियमितता पाए जाने की जानकारी दी गई।
प्रधान महालेखाकार ने यह भी बताया कि जांच के दौरान एप्लीकेशन कंट्रोल्स के अभाव की बात सामने आई है। इससे संबंधित प्रक्रियाओं की निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते हैं।
कई विभागों की योजनाओं की हुई सैंपल जांच
प्रेस वार्ता के दौरान केवल मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना ही नहीं, बल्कि परिवहन विभाग, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, झारखंड जल जीवन मिशन और राजस्व से संबंधित प्रतिवेदन एवं योजनाओं की सैंपल जांच के बारे में भी जानकारी दी गई।
प्रधान महालेखाकार ने बताया कि ऑडिट का उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन में मौजूद कमियों और व्यवस्थागत खामियों को सामने लाना है, ताकि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार किया जा सके।
कुल मिलाकर ऑडिट के निष्कर्षों में योजनाओं की निगरानी, दस्तावेजों के रखरखाव, सामाजिक लेखा परीक्षा, कार्यों को समय पर पूरा करने और तकनीकी नियंत्रण व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं।


