पश्चिमी सिंहभूम जिले के चार प्रवासी मजदूरों के साथ गुजरात के राजकोट में हुए कथित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। इन मजदूरों का कहना है कि करीब एक साल से उन्हें एक निजी फैक्ट्री में बिना मेहनताना दिए काम में जोता गया और मांगने पर उनकी पिटाई की गई।
कैसे मिला बाहर निकलने का रास्ता
चक्रधरपुर, गोइलकेरा और हाटगम्हरिया इलाकों से जुड़े इन चारों में एक महिला श्रमिक भी है। इनका दावा है कि रोजगार के वादे पर उन्हें राजकोट बुलाया गया, मगर वहां पहुंचते ही हालात बदल गए। न वेतन मिला, न परिसर से निकलने की छूट थी। बुधवार की रात मौका पाकर वे किसी तरह फैक्ट्री से निकल भागे और अभी राजकोट रेलवे स्टेशन पर शरण लिए हुए हैं, जहां न खाने के पैसे हैं, न घर वापसी के लिए किराया।
अभी भी फंसे हैं कई और साथी
मजदूरों के मुताबिक उनके कई साथी अब भी उसी कंपनी में कैद हैं और उन्हें डरा-धमकाकर काम कराया जा रहा है। यदि यह आरोप सही निकला तो सिंहभूम से जुड़ा यह मामला केवल चार लोगों तक सीमित नहीं रहेगा।
पीड़ितों ने झारखंड सरकार, जिला प्रशासन और श्रम विभाग से तुरंत हस्तक्षेप कर सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले ने प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।



