Friday, October 2

मार्च में NIA ने सात विदेशी नागरिकों को किया था गिरफ्तार, म्यांमार में ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग और हथियार पहुंचाने के आरोप; सितंबर में चार्जशीट से UAPA गायब, 1 अक्टूबर को कोर्ट में फिर हुई सुनवाई

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों से जुड़ा मामला पिछले कई महीनों से भारत की सुरक्षा एजेंसियों और अदालत के सामने चर्चा में है। मार्च 2026 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सात विदेशी नागरिकों को कथित आतंकी साजिश और म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग देने के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

लेकिन सितंबर में इस मामले ने नया मोड़ ले लिया। NIA ने 8 सितंबर को जो पहली चार्जशीट दाखिल की, उसमें UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। इसके बजाय सातों के खिलाफ इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट से जुड़े अपराधों का उल्लेख किया गया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि UAPA से जुड़े पहलू की जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

अब 1 अक्टूबर 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की फिर सुनवाई हुई। वैनडाइक ने अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होकर अगली सुनवाई में भारत लौटकर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बात कही। अदालत ने NIA की चार्जशीट पर विचार के लिए अगली तारीख 23 अक्टूबर तय की है।

मार्च में कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

मामले की शुरुआत मार्च 2026 में हुई। NIA के मुताबिक, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचे थे और वहां म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन और सैन्य प्रशिक्षण देने की गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था।

वैनडाइक को 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से पकड़ा गया।

गिरफ्तार यूक्रेनी नागरिकों के नाम हुरबा पेट्रो, तारास स्लिवियाक, इवान सुखानोव्स्की, मारियान स्टेफानकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की बताए गए हैं।

NIA के मुताबिक क्या था पूरा नेटवर्क?

NIA की जांच के अनुसार, आरोपी विदेशी नागरिक भारत में टूरिस्ट वीजा पर आए थे और बाद में पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर गए। एजेंसी का आरोप था कि उन्होंने मिजोरम में प्रवेश के लिए जरूरी परमिट के बिना प्रतिबंधित क्षेत्र में यात्रा की और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश किया।

जांच एजेंसी ने दावा किया कि इसके बाद वे म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों के संपर्क में आए। इन समूहों को ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली, ड्रोन वॉरफेयर और जामिंग तकनीक से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने का आरोप लगाया गया।

NIA ने यह भी दावा किया कि यूरोप से ड्रोन और उससे जुड़े उपकरणों की कई खेप भारत के रास्ते लाई गई थीं। जांच के दौरान कुछ ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बरामदगी/जब्ती का भी उल्लेख एजेंसी की ओर से किया गया।

शुरुआत में UAPA के तहत दर्ज हुआ था केस

मामला शुरू में काफी गंभीर धाराओं के साथ दर्ज किया गया था। NIA ने सातों के खिलाफ UAPA की धारा 18 के तहत आतंकी गतिविधि की साजिश से जुड़ा मामला दर्ज किया था।

जांच एजेंसी का आरोप था कि आरोपियों के म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों से संपर्क थे और उनकी गतिविधियां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हो सकती हैं।

NIA ने अदालत में यह भी दावा किया था कि आरोपियों के संपर्क ऐसे लोगों से थे जिनके पास हथियार थे और कुछ प्रतिबंधित भारतीय उग्रवादी समूहों से संभावित संबंधों की जांच भी की जा रही थी। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी नहीं हुआ है।

सितंबर में आया सबसे बड़ा कानूनी मोड़

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 8 सितंबर 2026 को आया।

NIA ने अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की, लेकिन इसमें UAPA की धाराएं नहीं लगाई गईं। सातों के खिलाफ मुख्य रूप से Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत आरोप रखे गए।

इनमें अनधिकृत प्रवेश और वीजा/विदेशी नागरिकों से जुड़े नियमों के उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं।

NIA ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि UAPA से जुड़े आरोपों की जांच पूरी तरह बंद नहीं हुई है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस हिस्से में आगे जांच चल रही है और अगर पर्याप्त सामग्री सामने आती है तो सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

कोर्ट ने चार्जशीट को लेकर क्या कहा?

वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल देते समय अदालत ने चार्जशीट के उस स्वरूप पर ध्यान दिया, जिसमें फिलहाल इमिग्रेशन संबंधी धाराएं ही शामिल थीं, जबकि UAPA से संबंधित जांच को आगे जारी बताया गया था।

अदालत ने माना कि जांच एजेंसी की ओर से आगे की जांच जारी होने की स्थिति में आरोपी को वैधानिक राहत के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल मिली।

छह यूक्रेनियनों को भी मिली बेल

इसके बाद छह यूक्रेनी नागरिकों को भी डिफॉल्ट बेल मिली। इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्होंने 5.5 लाख रुपये का जुर्माना जमा किया और अदालत ने उनकी रिहाई का रास्ता साफ किया।

इसके बाद अदालत ने सातों को एक महीने के लिए अपने-अपने देश जाने की अनुमति भी दी। उन्हें अमेरिका और यूक्रेन जाने के बाद तय अवधि के भीतर भारत लौटना था और जरूरत पड़ने पर जांच में सहयोग करना था।

अब 1 अक्टूबर को क्या हुआ?

अब इस पूरे मामले में 1 अक्टूबर को फिर सुनवाई हुई। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुआ।

उसने अदालत को बताया कि वह अगली सुनवाई में भारत लौटकर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होगा। रिपोर्ट के अनुसार, उसने 21 अक्टूबर की भारत वापसी की फ्लाइट भी बुक की है।

वहीं, मामले में आरोपी छह यूक्रेनी नागरिक 1 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत के सामने पेश नहीं हुए। अदालत ने NIA की चार्जशीट पर विचार के लिए 23 अक्टूबर की तारीख तय की है।

म्यांमार में ड्रोन हमले का एंगल भी सामने आया

सितंबर की शुरुआत में मामले ने एक और गंभीर मोड़ लिया था। NIA ने दिल्ली की अदालत को बताया कि उसे ऐसी विश्वसनीय जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर सातों विदेशी नागरिकों को म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले से जोड़कर भी जांच की जा रही थी।

एजेंसी ने वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिक विक्टर कामिंस्की से जेल में पूछताछ की अनुमति मांगी थी। अदालत ने पूछताछ की अनुमति दी थी।

हालांकि, इस दावे को भी NIA की जांच के आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अभी ऐसा कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि सातों ने उस ड्रोन हमले को अंजाम दिया था।

क्या UAPA पूरी तरह खत्म हो गया?

यह इस केस का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहली चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं हैं, लेकिन NIA ने UAPA से जुड़े पहलू की जांच जारी रखी है।

यानी यह कहना सही नहीं होगा कि अदालत ने सातों को आतंकी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है। दूसरी तरफ यह कहना भी सही नहीं होगा कि UAPA के तहत अपराध साबित हो चुका है।

मौजूदा स्थिति यह है कि पहली चार्जशीट में इमिग्रेशन संबंधी अपराधों को रखा गया है, जबकि कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं पर जांच आगे जारी है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आगे पूरक चार्जशीट की संभावना NIA ने अदालत के सामने रखी है।

मैथ्यू वैनडाइक कौन है?

मैथ्यू एरॉन वैनडाइक अमेरिकी नागरिक है। वह पहले लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान विद्रोही बलों के साथ जुड़ने और बाद में सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, उसने यूक्रेन में भी सैन्य और सुरक्षा प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां की हैं। वह Sons of Liberty International नाम की संस्था से भी जुड़ा रहा है, जो खुद को कमजोर समुदायों के लिए सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराने वाली संस्था बताती है।

हालांकि, उसकी पिछली गतिविधियां अपने आप में भारत में दर्ज मौजूदा मामले में अपराध साबित नहीं करतीं। मौजूदा केस में उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों का निर्धारण भारतीय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

यूक्रेन ने गिरफ्तारी पर जताया था विरोध

मार्च में छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद यूक्रेन सरकार ने भारत के सामने आधिकारिक विरोध भी दर्ज कराया था। यूक्रेनी पक्ष ने अपने नागरिकों को कांसुलर सहायता उपलब्ध कराने और उनकी गिरफ्तारी के आधार पर सवाल उठाए थे।

यूक्रेनी पक्ष का कहना था कि उसके नागरिकों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के स्थापित तथ्य सामने नहीं आए हैं। दूसरी ओर भारतीय जांच एजेंसी ने अपनी जांच के आधार पर गंभीर आरोप लगाए थे।

छह महीने बाद केस कहां पहुंचा?

पूरे मामले को टाइमलाइन में समझें तो तस्वीर इस तरह बनती है—

13 मार्च 2026: NIA ने वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को अलग-अलग एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया।

मार्च 2026: सभी को NIA की हिरासत के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया। केस में UAPA की धारा 18 समेत गंभीर आरोप लगाए गए।

अगस्त-सितंबर: NIA ने म्यांमार में कथित ड्रोन ट्रेनिंग और एक नागरिक विमान पर ड्रोन हमले से जुड़े एंगल की भी जांच की।

8 सितंबर: NIA ने पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें UAPA के बजाय Immigration and Foreigners Act की धाराएं लगाई गईं। UAPA जांच जारी रखने की बात कही गई।

18 सितंबर: मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल मिली।

23-24 सितंबर: छह यूक्रेनी नागरिकों को भी डिफॉल्ट बेल मिली और इमिग्रेशन मामलों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिहाई हुई।

25 सितंबर: अदालत ने सातों को एक महीने के लिए अमेरिका/यूक्रेन जाने की अनुमति दी, साथ ही भारत लौटने की शर्त रखी।

1 अक्टूबर: वैनडाइक ने अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होकर अगली सुनवाई में भारत लौटने की बात कही। छह यूक्रेनी नागरिक पेश नहीं हुए। चार्जशीट पर अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।

अभी सबसे बड़े सवाल क्या हैं?

इस केस में फिलहाल तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं—

पहला, क्या NIA को आगे की जांच में UAPA के तहत आरोप लगाने लायक ठोस साक्ष्य मिलते हैं?

दूसरा, म्यांमार में कथित ड्रोन ट्रेनिंग और नागरिक विमान पर ड्रोन हमले के बीच वास्तव में क्या संबंध था?

तीसरा, सातों विदेशी नागरिकों की गतिविधियों का भारत की सुरक्षा या भारतीय उग्रवादी संगठनों से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं?

इन सवालों का अंतिम जवाब आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही से ही सामने आएगा।

एक नजर में पूरा मामला

  • मुख्य आरोपी: मैथ्यू एरॉन वैनडाइक, अमेरिकी नागरिक
  • अन्य आरोपी: छह यूक्रेनी नागरिक
  • गिरफ्तारी: मार्च 2026
  • गिरफ्तारी की जगह: कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट
  • मुख्य आरोप: म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन/सैन्य प्रशिक्षण देने का आरोप
  • शुरुआती केस: UAPA की धारा 18 समेत गंभीर आरोप
  • 8 सितंबर की चार्जशीट: Immigration and Foreigners Act की धाराएं 21 और 23
  • UAPA की स्थिति: पहली चार्जशीट में शामिल नहीं, जांच जारी
  • बेल: सातों को डिफॉल्ट बेल
  • विदेश जाने की अनुमति: एक महीने के लिए
  • 1 अक्टूबर की स्थिति: वैनडाइक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश; छह यूक्रेनी नागरिक पेश नहीं हुए
  • अगली सुनवाई: 23 अक्टूबर 2026
  • मामले की वर्तमान स्थिति: जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी
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SURBHI SHIPRA is a news editor, content writer , and graphic designer with experience in digital journalism and online media . she specializes in editing news ,articles, content writing, fact-checking , and creating engaging digital content . Along with editorial work, She designs eye-catching graphic and YouTube thumbnails . She is committed to delivering accurate, informative , and reader- focused content with creativity and professionalism. currently working as a journalist at Jharkhand Digital

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