रांची: आर्य ज्ञान प्रचार समिति, रांची द्वारा संचालित सीनियर सिटीजन होम के तत्वावधान में डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल, बरियातू रोड में चल रही संगीतमय श्रीकृष्ण कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। कथावाचक आचार्य कुलदीप जी ने राजसूय यज्ञ, द्रौपदी चीरहरण और महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से समाज में न्याय और नारी सम्मान का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की यज्ञशाला में यज्ञ के साथ हुई। आचार्य कुलदीप जी ने यज्ञ संपन्न कराया और यजमानों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद स्वागताध्यक्ष संजय पोद्दार और सुनील गुप्ता ने सपत्नीक आचार्य जी और संगीतकारों का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। विद्यालय परिवार के शिक्षक-शिक्षिकाओं और अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया।
राजसूय यज्ञ और श्रीकृष्ण की विनम्रता का प्रसंग
कथा के दौरान आचार्य कुलदीप जी ने राजसूय यज्ञ का प्रसंग सुनाते हुए श्रीकृष्ण द्वारा यज्ञ में पैर धोने और जूठन उठाने जैसे प्रसंगों के माध्यम से उनकी विनम्रता और सेवा भाव को समझाया। उन्होंने श्रीकृष्ण को केवल शक्ति के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और कर्तव्य के मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया।
इसके बाद उन्होंने महाभारत के चीरहरण प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया और समाज में महिलाओं के सम्मान को लेकर गंभीर संदेश दिया।
‘जहां नारी का सम्मान नहीं, वहां विनाश निश्चित’
आचार्य कुलदीप जी ने कहा कि जिस समाज में नारी का सम्मान नहीं होता, उसकी स्थिति कभी मजबूत नहीं रह सकती। उन्होंने द्रौपदी चीरहरण के प्रसंग के माध्यम से कहा कि अन्याय के समय मौन रहना भी समाज के लिए घातक है।
उन्होंने कहा कि जब सज्जन और न्यायप्रिय लोग अन्याय के सामने मौन हो जाते हैं, तो इससे गलत शक्तियों को बढ़ावा मिलता है। उनके अनुसार, समाज और देश की रक्षा के लिए लोगों को अन्याय के खिलाफ स्वयं खड़ा होना होगा।
पांडवों के वनवास और संघर्ष का प्रसंग
कथा में पांडवों के वनवास और उनके संघर्ष का भी वर्णन किया गया। आचार्य जी ने बताया कि वनवास के दौरान पांडवों ने अपनी शक्ति अर्जित की और श्रीकृष्ण से लगातार मार्गदर्शन लेते रहे। उन्होंने कहा कि महाभारत के प्रसंग आज भी समाज को न्याय, साहस और कर्तव्य का संदेश देते हैं।
कार्यक्रम में आर्य ज्ञान प्रचार समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न गुप्ता, आर्य समाज रांची की संरक्षिका सुशीला गुप्ता, सुनील गुप्ता, निशा, राजेंद्र आर्य, अजय आर्य, नीलकमल वर्मा, अशोक भाटिया समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कथा का समापन शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। आयोजकों के अनुसार, कथा 12 सितंबर तक शाम 4 बजे से 7 बजे तक और 13 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होगी।
