योग, संवाद और अनुभव आधारित गतिविधियों से छात्रों को तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन की मिली सीख; विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर रहा जोर
रांची: विद्यार्थियों का विकास केवल पढ़ाई और परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में पांच दिवसीय यूथ एम्पावरमेंट एंड स्किल्स (YES!) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक चले इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, आत्म-जागरूकता, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और जीवन कौशल से जुड़ी व्यावहारिक सीख दी गई।
झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी की ओर से उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के अंतर्गत तथा NUSRL के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करना था।
योग और संवादात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों ने सीखी तनाव से निपटने की कला
कार्यक्रम के विभिन्न सत्र आर्ट ऑफ लिविंग की शिक्षिका रिया तायल ने संचालित किए। इन सत्रों में योग, क्रियाओं, खेलों, संवादात्मक गतिविधियों और अनुभव आधारित अभ्यासों को शामिल किया गया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को समझने, मन को शांत रखने और कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान एकाग्रता बढ़ाने, तनाव को नियंत्रित करने, आत्मविश्वास विकसित करने और संवाद कौशल बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि नियमित दिनचर्या, सकारात्मक सोच और अपनी आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके जीवन को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।
सत्रों में केवल जानकारी देने के बजाय विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। इससे उन्हें अपने अनुभव साझा करने, दूसरे प्रतिभागियों के विचार समझने और अपनी कमजोरियों तथा क्षमताओं पर विचार करने का अवसर मिला।
असफलताओं से सीखने और वर्तमान में जीने की मिली प्रेरणा
कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों ने इसे अपने व्यक्तित्व और जीवनशैली को समझने का उपयोगी अनुभव बताया। उनके अनुसार, पांच दिनों के दौरान सीखी गई बातें पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में भी काम आ सकती हैं।
बीए एलएलबी की छात्रा सुप्रिया ने कार्यक्रम को शानदार अनुभव बताते हुए कहा कि पांच दिनों में उन्होंने कई नई बातें सीखीं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में कराई गई क्रियाएं प्रभावी और मन को शांत करने वाली थीं। दूसरे विद्यार्थियों से मिलने और उनके साथ संवाद करने से भी उन्हें काफी कुछ सीखने का अवसर मिला।
बीए एलएलबी (2026–31 बैच) की छात्रा कुमारी अनन्या ने कहा कि कार्यक्रम ने उन्हें किसी भी काम को पूरे ध्यान से करने और वर्तमान में जीने का महत्व समझाया। उन्होंने असफलताओं को स्वीकार करने और उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने की जरूरत पर भी जोर दिया।
अनन्या के अनुसार, दूसरों की राय से अनावश्यक रूप से प्रभावित होने के बजाय उपयोगी सलाह को समझना और अपनाना जरूरी है। उन्होंने एक अच्छा श्रोता बनने को भी प्रभावी संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, सत्रों का संवादात्मक और रोचक तरीका उन्हें खुद को बेहतर ढंग से समझने में मददगार रहा।
तनाव, नींद और दिनचर्या सुधारने पर भी रहा जोर
कार्यक्रम में प्रथम वर्ष के बीए एलएलबी छात्र पृथ्वी राज ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए पहला अनुभव था। उनके अनुसार, यहां मिली सीख तनाव कम करने, दिनचर्या को व्यवस्थित करने और नींद के समय में सुधार करने की दिशा में उपयोगी रही।
पृथ्वी राज ने अनावश्यक सोच से बचने और वर्तमान परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रिश्तों में परिपक्वता बनाए रखना और किसी भी बात का जवाब देने से पहले दूसरे व्यक्ति को ध्यान से सुनना जरूरी है।
उनके अनुभव से यह भी सामने आया कि जीवन कौशल से जुड़े ऐसे सत्र विद्यार्थियों को अपनी आदतों और व्यवहार पर विचार करने का अवसर देते हैं। इससे वे पढ़ाई के दबाव और व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियों को अधिक समझदारी से संभालने के तरीके सीख सकते हैं।
शैक्षणिक विकास के साथ व्यक्तित्व निर्माण पर जोर
पांच दिवसीय YES! कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों के लिए आत्ममंथन और नई सीख के अवसर के रूप में हुआ। कार्यक्रम ने उन्हें अपनी जीवनशैली, सोच, व्यवहार और दैनिक आदतों को समझने के साथ-साथ व्यक्तिगत तथा शैक्षणिक जीवन में संतुलन स्थापित करने के व्यावहारिक तरीकों से परिचित कराया।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क, समस्या समाधान, नवाचार और आत्मविश्वास जैसे गुणों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। साथ ही, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को विद्यार्थी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
