बोकारो: सड़क हादसे में घायल की जान बचाने के लिए शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। दुर्घटना के बाद जितनी जल्दी घायल को प्राथमिक उपचार और मेडिकल मदद मिलती है, उतनी ही उसकी स्थिति बिगड़ने से रोकने की संभावना बढ़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोकारो में पुलिस जवानों को फर्स्ट एड और आपात स्थिति में त्वरित रिस्पॉन्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बुधवार को पुलिस लाइन में सिविल डिफेंस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर सबसे ज्यादा अहम होता है।
उपायुक्त ने कहा कि सड़क सुरक्षा से लेकर विधि-व्यवस्था तक किसी भी आपात स्थिति में पुलिस का रिस्पॉन्स सबसे पहले सामने आता है। ऐसे में पुलिस जवानों को आपात परिस्थितियों में सही तरीके से प्रतिक्रिया देने और घायल को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर सबसे ज्यादा अहम होता है। इस दौरान कोशिश होनी चाहिए कि घायल की हालत में सुधार हो या कम से कम उसकी स्थिति और खराब न हो। घायल को कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाना और रास्ते में जरूरी प्राथमिक उपचार देना जान बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
5 हजार लोगों को मिल चुका है सिविल डिफेंस प्रशिक्षण
उपायुक्त ने बताया कि सिविल डिफेंस के माध्यम से अब तक करीब पांच हजार नागरिकों को प्रशिक्षण और जागरूकता दी जा चुकी है। दुर्घटना की सूचना तुरंत प्रशिक्षित लोगों तक पहुंच सके, इसके लिए सिविल डिफेंस के व्हाट्सऐप ग्रुप को पुलिस व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे दुर्घटना स्थल के आसपास मौजूद प्रशिक्षित लोग जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद के लिए पहुंच सकेंगे।
प्रत्येक पुलिस वाहन और थाना में फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही थाना और पीसीआर वाहनों में नजदीकी एंबुलेंस की उपलब्धता और संपर्क की जानकारी रखने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
घायल की जान बचाने वाले पुलिसकर्मी होंगे प्रोत्साहित
डीसी ने कहा कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले पुलिसकर्मियों को गुड समैरिटन की तर्ज पर प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे पुलिसकर्मियों को प्रमाण पत्र देने और उनके सेवा अभिलेख में उत्कृष्ट कार्य की प्रविष्टि करने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। वहीं, सिविल डिफेंस का प्रशिक्षण लेने वाले जवानों के सेवा अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया जाएगा।
पुलिस जवानों को सिखाए गए फर्स्ट एड के तरीके
पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा ने कहा कि दुर्घटना के बाद घायल को तत्काल सहायता मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने जवानों से प्रशिक्षण में बताई गई प्राथमिक उपचार, रक्तस्राव रोकने, घायल को सुरक्षित तरीके से संभालने और जल्द अस्पताल पहुंचाने की तकनीकों को गंभीरता से सीखने की अपील की।
प्रशिक्षण के दौरान राज्य प्रशिक्षक सिविल डिफेंस डॉ. एसपी वर्मा, प्रशिक्षक डॉ. निशांत कुमार, डॉ. पूजा और डॉ. आकाश ने ‘गोल्डन रूल्स ऑफ फर्स्ट एड’ की जानकारी दी। जवानों को डीआरएससीएबी प्रक्रिया के जरिए घटनास्थल की सुरक्षा, घायल की प्रतिक्रिया जांचने, मदद के लिए आसपास के लोगों को बुलाने और सर्कुलेशन, एयरवे व ब्रीदिंग की जांच के बारे में बताया गया।
इसके अलावा सीपीआर, रक्तस्राव रोकने, घायल के सिर और हाथ-पैर को सुरक्षित तरीके से संभालने तथा उपलब्ध संसाधनों से प्राथमिक सहायता देने की व्यवहारिक जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार, एपीआरओ अविनाश कुमार सिंह समेत पुलिस पदाधिकारी, जवान और सिविल डिफेंस से जुड़े प्रशिक्षक मौजूद रहे।
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