Thursday, November 5

डिजिटल युग में दादा-दादी और नाना-नानी के संस्कारों व अनुभवों का महत्व बताया; ‘सुपर ग्रैंड्स गोज डिजिटल’ और ‘धरोहर’ नाटक ने बांधा समां

रांची। डिजिटल तकनीक के तेजी से बदलते दौर में जहां नई पीढ़ी का जीवन मोबाइल और इंटरनेट के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है, वहीं परिवार में दादा-दादी और नाना-नानी की भूमिका आज भी संस्कारों, अनुभवों और जीवन मूल्यों की मजबूत नींव बनी हुई है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए हेहल स्थित डीएवी आनंद स्वामी पब्लिक स्कूल में गुरुवार को ग्रैंडपेरेंट्स डे का भव्य और भावपूर्ण आयोजन किया गया। समारोह में बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बुजुर्गों के प्रति प्रेम, सम्मान और पारिवारिक विरासत के महत्व को दर्शाया।

विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दादा-दादी और नाना-नानी के आत्मीय स्वागत से हुई। इसके बाद मुख्य अतिथियों ने पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से डीएवी गान प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।

पौधे भेंट कर बुजुर्गों को किया सम्मानित, पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका डॉ. रेशू चौधरी ने उपस्थित सभी बुजुर्गों का स्वागत किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए दादा-दादी और नाना-नानी को सुंदर पौधे भेंट कर सम्मानित किया। अपने स्वागत संबोधन में उन्होंने बुजुर्गों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार और समाज को सही दिशा देने में उनके अनुभवों और संस्कारों की अहम भूमिका होती है।

इस अवसर पर एआरओ (झारखंड जोन-बी) एमके सिन्हा ने भी विशेष संबोधन दिया। उन्होंने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में दादा-दादी और नाना-नानी के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के अनुभव, नैतिक मूल्य और जीवन से मिली सीख बच्चों को बेहतर इंसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘सुपर ग्रैंड्स गोज डिजिटल’ ने दिखाया दादा-दादी का आधुनिक अंदाज

समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने मनमोहक और ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं, कक्षा दो के विद्यार्थियों ने प्रभावशाली भाषण के जरिए अपने दादा-दादी और नाना-नानी के प्रति प्रेम एवं सम्मान की भावना व्यक्त की।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कक्षा पहली के विद्यार्थियों की स्किट-कम-डांस प्रस्तुति ‘सुपर ग्रैंड्स गोज डिजिटल’ रही। इस प्रस्तुति में आज के तकनीक प्रधान दौर में बुजुर्गों के बदलते स्वरूप को रोचक और हास्यपूर्ण अंदाज में दिखाया गया। बच्चों ने यह संदेश दिया कि उम्र बढ़ने के साथ सीखने और नई तकनीक अपनाने की इच्छा कम नहीं होती। दादा-दादी भी डिजिटल दुनिया के साथ कदमताल कर सकते हैं।

‘धरोहर’ नाटक ने परिवार और संस्कृति से जुड़े रहने का दिया संदेश

कक्षा दूसरी के विद्यार्थियों ने ‘धरोहर’ नामक नाटक का मंचन कर सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक मूल्यों को सहेजने का संदेश दिया। नाटक के माध्यम से बच्चों ने बताया कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों, परंपराओं और परिवार के संस्कारों को भूलना नहीं चाहिए। प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत किया।

शिक्षिकाओं के प्रयास से सफल हुआ आयोजन

कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की शिक्षिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रभारी शिक्षिका जॉली नंदी और अंजना मिश्रा सहित ईईडीपी विभाग की सभी शिक्षिकाओं ने बच्चों की तैयारियों, मंच संचालन और कार्यक्रम प्रबंधन में योगदान दिया। उनकी देखरेख में विद्यार्थियों ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं।

समारोह के अंतिम चरण में धन्यवाद ज्ञापन किया गया। प्रधानाध्यापिका डॉ. रेशू चौधरी ने सफल आयोजन के लिए पूरी टीम, शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और बुजुर्गों के आशीर्वाद से जोड़े रखने का बेहतर माध्यम हैं। उन्होंने बच्चों को परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करने और उनसे जीवन के अनुभव सीखने के लिए प्रेरित किया।

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