Tuesday, October 13

हजारीबाग। पर्यावरण संरक्षण का संदेश मंगलवार को हजारीबाग की सड़कों पर उस वक्त नजर आया, जब साइकिलों का काफिला कनहरी से दूधमटिया की ओर निकला। साइकिल की घंटियों के बीच ‘पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ और ‘हरियाली है तो खुशहाली है’ जैसे नारों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। रैली में शामिल प्रतिभागियों ने साइकिल चलाते हुए लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाने का संदेश दिया।

यह पर्यावरण जागरूकता साइकिल रैली वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड और हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल की ओर से आयोजित की गई। कार्यक्रम में वन विभाग के पदाधिकारी और कर्मचारी, स्कूली बच्चे तथा स्थानीय लोग शामिल हुए। रैली का उद्देश्य केवल लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ना भी रहा।

साइकिल रैली ने दिया दोहरा संदेश

कनहरी से शुरू हुई रैली जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसमें शामिल लोगों की संख्या और उत्साह ने इसे खास बना दिया। साइकिल पर सवार बच्चे और वन विभाग के कर्मचारी हाथों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेश लेकर आगे बढ़े। इस दौरान लोगों को जंगलों की सुरक्षा, पौधरोपण, वन्यजीव संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के प्रति सचेत किया गया।

रैली के जरिए यह संदेश भी देने की कोशिश की गई कि पर्यावरण को बचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी बदलाव जरूरी है। साइकिल जैसे पर्यावरण अनुकूल साधन का इस्तेमाल इसी सोच को सामने रखने का एक माध्यम बना।

‘हरियाली है तो खुशहाली है’ का संदेश

रैली के दौरान ‘हरियाली है तो खुशहाली है’, ‘पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ जैसे नारे लगातार सुनाई देते रहे। प्रतिभागियों ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की देखभाल करने की अपील की।

वन विभाग की ओर से कहा गया कि पेड़ केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ हवा, जल संरक्षण, मिट्टी की सुरक्षा और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जंगलों के संरक्षण से वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिलता है और पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहता है।

प्लास्टिक कम करने की भी अपील

रैली के दौरान पर्यावरण संरक्षण के साथ प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। अधिकारियों ने लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।

अधिकारियों का कहना था कि प्लास्टिक प्रदूषण, जंगलों पर बढ़ता दबाव और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इनका असर सीधे तौर पर इंसान, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ता है। ऐसे में पर्यावरण की रक्षा के लिए समाज के हर वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी।

बच्चों की भागीदारी ने बढ़ाया उत्साह

साइकिल रैली में स्कूली बच्चों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। बच्चों ने साइकिल चलाते हुए पर्यावरण संरक्षण के नारे लगाए और लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया। उनका उत्साह यह बताने के लिए काफी था कि पर्यावरण संरक्षण की सोच को नई पीढ़ी तक पहुंचाना कितना जरूरी है।

वनकर्मियों और बच्चों की संयुक्त भागीदारी ने रैली को एक व्यापक संदेश दिया। इसमें एक तरफ जंगलों की सुरक्षा से सीधे जुड़े वनकर्मी थे, तो दूसरी तरफ भविष्य की जिम्मेदारी संभालने वाली नई पीढ़ी।

प्रकृति बचाना सिर्फ विभाग की जिम्मेदारी नहीं

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छ हवा और संतुलित पर्यावरण के लिए आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर एक पौधा लगाए, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करे, पानी की बर्बादी रोके और जंगलों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करे, तो इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

कनहरी से शुरू हुई यह साइकिल रैली दूधमटिया पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में पर्यावरण संरक्षण के संदेश ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम लोगों को प्रकृति से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित करते हैं।

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