रांची। झारखंड की राजनीति में आजसू पार्टी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव और ईचागढ़ के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी हरेलाल महतो ने आजसू पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और केंद्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है। हरेलाल महतो ने पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो को अपना त्यागपत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है। हरेलाल महतो ने पत्र में लिखा है कि आजसू के साथ उनका जुड़ाव सम्मान और गौरव का विषय रहा।
अपने इस्तीफे में हरेलाल महतो ने “वर्तमान परिस्थितियों” का हवाला दिया है। साथ ही उन्होंने पार्टी के साथ अपने लंबे जुड़ाव के दौरान मिले सहयोग और साथ के लिए सभी का आभार जताया है।
हरेलाल के बाद केंद्रीय महासचिव का भी इस्तीफा
हरेलाल महतो के इस्तीफे के बाद केंद्रीय महा सचिव शंकर मौर्या ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। मौर्या आजसू पार्टी के बड़े चेहरों में से एक थे। इन्होने भी अपने इस्तीफे का कारन निजी बताया है। ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी आजसू के संगठन पर इसका असर देखने को मिला है। क्षेत्र के चारों प्रखंड अध्यक्षों समेत कई पदाधिकारियों ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इससे इलाके में पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्तर पर हलचल बढ़ गई है।
इस्तीफा देने वाले अन्य पदाधिकारियों में चांडिल प्रखंड अध्यक्ष दुर्योधन गोप, कुकड़ू प्रखंड अध्यक्ष अरुण महतो, ईचागढ़ प्रखंड अध्यक्ष गोपेश कुमार महतो और ईचागढ़ प्रखंड सचिव तुलसी महतो शामिल हैं। चारों ने अपने त्यागपत्र में निजी कारणों का हवाला दिया है। हरेलाल महतो के साथ एक साथ कई स्थानीय पदाधिकारियों के इस्तीफे ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
BJP में जाने की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
हरेलाल महतो के इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके BJP का दामन थामने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी तक हरेलाल महतो की ओर से भाजपा में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
ऐसे में फिलहाल इतना ही स्पष्ट है कि उन्होंने आजसू से अपना नाता तोड़ लिया है। उनके अगले राजनीतिक कदम पर अब सभी की नजर है।
ईचागढ़ की राजनीति पर पड़ेगा असर?
हरेलाल महतो लंबे समय से ईचागढ़ की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके साथ क्षेत्रीय संगठन के कई पदाधिकारियों का इस्तीफा देना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस्तीफा देने वाले नेता आगे किस राजनीतिक दिशा में जाते हैं और इसका आजसू के संगठन पर क्या असर पड़ता है।
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