रांची: शहर में लगे होर्डिंग और विज्ञापन बोर्ड को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के 19 अगस्त 2026 के आदेश के बाद कार्रवाई की तस्वीर स्पष्ट हो गई है। कोर्ट ने सभी होर्डिंग्स को एक साथ हटाने का निर्देश नहीं दिया है, बल्कि उनकी स्थिति और लाइसेंस के आधार पर अलग-अलग कार्रवाई का रास्ता तय किया है। आदेश में सड़क सुरक्षा, फुटपाथ पर पैदल चलने वालों की सुविधा और अवैध विज्ञापन पर सख्ती को प्राथमिकता दी गई है।
कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, सड़क डिवाइडर पर लगे बिजली के पोल, लैंप पोस्ट या स्ट्रीट लाइट पर लगाए गए होर्डिंग्स को रांची नगर निगम को हटाना या दूसरी जगह स्थानांतरित करना होगा। इस संबंध में 11 अगस्त 2026 को दिए गए आदेश के अनुरूप कार्रवाई करने को कहा गया है।
फुटपाथ पर कम ऊंचाई वाले बोर्ड भी हटेंगे या शिफ्ट होंगे
फुटपाथ और निर्धारित वॉकवे पर लगे विज्ञापन बोर्ड को लेकर भी कोर्ट ने स्पष्ट व्यवस्था दी है। यदि कोई बोर्ड सड़क या वॉकवे के स्तर से 12 फीट से कम ऊंचाई पर है, तो उसे या तो दूसरी जगह स्थानांतरित करना होगा या उसकी ऊंचाई बढ़ानी होगी।
हालांकि, बदलाव करते समय विज्ञापन स्ट्रक्चर की मजबूती और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना होगा। यानी केवल बोर्ड को ऊंचा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नया स्ट्रक्चर राहगीरों और यातायात के लिए खतरा न बने।
बिना लाइसेंस वाले होर्डिंग पर सबसे सख्त आदेश
अवैध यानी बिना लाइसेंस लगे होर्डिंग्स को लेकर हाईकोर्ट ने सबसे सख्त रुख अपनाया है। ऐसे किसी भी होर्डिंग या बिलबोर्ड को RMC तत्काल हटाने की कार्रवाई कर सकता है।
यहां विज्ञापन की प्रकृति भी मायने नहीं रखेगी। होर्डिंग किसी कंपनी के प्रोडक्ट का हो, किसी संस्थान या संगठन का हो अथवा किसी राजनीतिक दल से संबंधित हो – यदि वह बिना वैध लाइसेंस के लगा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे अनलाइसेंसी होर्डिंग को हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था को नोटिस देना भी जरूरी नहीं है। यानी नियमों के विपरीत लगे बिना लाइसेंस वाले विज्ञापन बोर्ड पर नगर निगम सीधे कार्रवाई कर सकता है।
लाइसेंसधारी विज्ञापनदाताओं को मिली प्रक्रियात्मक सुरक्षा
दूसरी ओर, जिन होर्डिंग्स के पास वैध लाइसेंस है, उनके लिए कोर्ट ने अलग प्रक्रिया निर्धारित की है। यदि कोई लाइसेंसी होर्डिंग 11 अगस्त और 19 अगस्त के आदेश में निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं है, तो नगर निगम उसे सीधे नहीं हटा सकता।
ऐसे मामले में पहले संबंधित लाइसेंसधारी को सात दिन का नोटिस देना होगा। इस दौरान उसे होर्डिंग को दूसरी जगह स्थानांतरित करने, हटाने या आवश्यक बदलाव कर उसे नियमों के अनुरूप करने का अवसर दिया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि लाइसेंस होना अपने आप में नियमों से छूट नहीं देता। लाइसेंसी होर्डिंग को भी हाईकोर्ट की तय शर्तों का पालन करना होगा, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा।
अब कार्रवाई लाइसेंस और लोकेशन के आधार पर होगी
हाईकोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट है कि शहर में लगे सभी विज्ञापन बोर्डों को एक ही नजर से नहीं देखा जाएगा। सड़क के डिवाइडर या स्ट्रीट लाइट पर लगे होर्डिंग, फुटपाथ पर कम ऊंचाई वाले बोर्ड, बिना लाइसेंस वाले विज्ञापन और लाइसेंसी लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वाले होर्डिंग – इन सभी के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं।
ऐसे में अब रांची नगर निगम के सामने बड़ी जिम्मेदारी है कि वह शहर में लगे होर्डिंग्स का सत्यापन करे और कोर्ट के निर्देश के मुताबिक श्रेणीवार कार्रवाई करे। वहीं, विज्ञापन एजेंसियों और लाइसेंसधारियों को भी अपने होर्डिंग की वैधता, स्थान और संरचना की जांच कर नियमों के अनुरूप कदम उठाने होंगे।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का आदेश शहर से हर होर्डिंग हटाने का आदेश नहीं है। इसका मुख्य फोकस अवैध विज्ञापन और ऐसे होर्डिंग्स पर कार्रवाई करना है, जो सड़क सुरक्षा या पैदल यात्रियों के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। साथ ही वैध लाइसेंस वाले विज्ञापनदाताओं के लिए कार्रवाई से पहले सात दिन का अवसर देकर प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया गया है।
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