“मारी छोरियाँ छोरों से कम हैं के?” – बॉलीवुड फिल्म दंगल

फिल्म दंगल का यह मशहूर डायलॉग भले ही रील लाइफ का हो, लेकिन भारतीय महिला कबड्डी टीम ने इसे रियल लाइफ में सच साबित कर दिखाया है। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एक और शानदार उपलब्धि हासिल की है। ईरान के खिलाफ खिताबी मुकाबले में जीत दर्ज करते हुए टीम इंडिया ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया, जो इस खेल में भारत का चौथा एशियन गेम्स गोल्ड है। टोकाई सिटीजन जिम्नेशियम में हुए इस हाई-वोल्टेज फाइनल में भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बावजूद संयम बनाए रखा और 37-34 के स्कोर से जीत हासिल की।
पहले हाफ की बढ़त बनी टर्निंग पॉइंट
मैच के पहले हाफ में भारतीय टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 22-16 की बढ़त बना ली थी। हालांकि दूसरे हाफ में ईरान ने जोरदार वापसी की और 18 अंक जुटाए, जबकि भारत सिर्फ 15 अंक ही हासिल कर सका। लेकिन पहले हाफ में बनाई गई 6 अंकों की बढ़त निर्णायक साबित हुई और अंत में भारत तीन अंकों के अंतर से विजयी रहा।
आखिरी 5 मिनट रहे बेहद रोमांचक
मुकाबले के आखिरी 5 मिनट में दोनों टीमों का स्कोर बराबरी पर आ गया था, जिससे मैच किसी भी करवट बैठ सकता था। इस नाजुक मोड़ पर भारतीय टीम के अनुभवी खिलाड़ियों ने संयम और कौशल दिखाते हुए ईरान को पीछे छोड़ दिया।
अंकों का पूरा गणित
भारत को 8 बोनस पॉइंट मिले, जबकि ईरान को 6। दोनों टीमों को ऑल आउट के लिए दो-दो अंक मिले। सुपर टैकल में भारत आगे रहा और उसे 3 अंक मिले, जबकि ईरान को सिर्फ 1 मिला। टेक्निकल पॉइंट में ईरान को 2 अंक मिले, तो वहीं ग्रीन कार्ड की वजह से भारत को अतिरिक्त 2 अंक हासिल हुए।
आइए जानते हैं कि भारतीय महिला कबड्डी टीम का रिकॉर्ड पहले कैसा रहा है…
महिला कबड्डी में एशियाड में कैसा है भारत का रिकॉर्ड?
बता दे एशियन गेम्स में महिला कबड्डी को 2010 में शामिल किया गया था, जबकि पुरुष कबड्डी 1990 से इसका हिस्सा रहा है। 2010 से अब तक 16 साल में पांच एशियन गेम्स खेले जा चुके हैं 2010 में ग्वांगझू, 2014 में इंचियोन, 2018 में जकार्ता-पालेमबांग, 2022 में हांगझोउ और अब 2026 में। इन पांच एशियन गेम्स में से भारत ने चार बार स्वर्ण पदक जीता है और सिर्फ एक बार रजत से संतोष करना पड़ा। भारत ने 2010, 2014, 2022 और अब 2026 में गोल्ड जीता, जबकि 2018 में ईरान के खिलाफ फाइनल में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था और उस साल ईरान ने खिताब अपने नाम किया था।
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