गुमला: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और दूरदराज के इलाकों तक इलाज की सुविधा पहुंचाने की बात लगातार कही जाती है। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी डॉ. इरफान अंसारी के पास है और विभाग खुद दूरदराज व कठिन इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता बताता है।
लेकिन गुमला सदर अस्पताल के डायलिसिस सेंटर की तस्वीर इन दावों से अलग नजर आ रही है। यहां चार मशीनें लगी हैं, लेकिन इनमें से तीन पिछले करीब दो सप्ताह से खराब हैं। फिलहाल एक ही मशीन के सहारे डायलिसिस चल रहा है और इसका सीधा असर उन 29 मरीजों पर पड़ रहा है, जो नियमित इलाज के लिए इसी सेंटर पर निर्भर हैं।
चारों मशीनें चालू रहने पर एक दिन में करीब 15 मरीजों का डायलिसिस हो सकता है। अभी यह क्षमता घटकर करीब 4-5 मरीज प्रतिदिन रह गई है। जिन मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस की जरूरत होती है, उनके लिए हर दिन का इंतजार परेशानी बढ़ा रहा है।
बढ़ती मरीज की संख्या…घटते इलाज की छमता
पिछले एक साल में सेंटर पर डायलिसिस कराने वाले मरीजों की संख्या करीब 18 से बढ़कर 29 हो गई। यानी जरूरत बढ़ी, लेकिन दूसरी तरफ चार में से तीन मशीनें बंद पड़ी हैं।
58 वर्षीय देशबंधु प्रजापति पिछले करीब तीन साल से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्हें सप्ताह में तीन बार डायलिसिस की जरूरत होती है, लेकिन मशीन खराब होने के बाद फिलहाल उन्हें सिर्फ दो दिन डायलिसिस मिल पा रहा है।
वहीं 65 वर्षीय बलदेव प्रसाद बताते हैं कि डायलिसिस के लिए कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है। मशीनों की कमी के कारण मरीजों का तय शेड्यूल भी प्रभावित हो रहा है।
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दो सप्ताह से खराब मशीनें, मरीजों के सामने भुगतान का इंतजार
मशीनों में खराबी की जानकारी करीब दो सप्ताह पहले संबंधित एजेंसी को दिए जाने की बात सामने आई है। सेंटर का संचालन पीपीपी मॉडल के तहत स्क्वाज संजीवनी प्राइवेट लिमिटेड कर रही है और मशीनों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी की बताई गई है।
इसी बीच भुगतान से जुड़ा मामला भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पीपीपी मद में करीब 10 लाख, आयुष्मान योजना में करीब 11 लाख और लोअर इनकम श्रेणी में करीब 5 लाख रुपये बकाया बताए जा रहे हैं। एजेंसी की ओर से भुगतान के लिए अधिकारियों को आवेदन दिए जाने की बात कही गई है। एजेंसी का कहना है कि भुगतान होने के बाद मशीनों को दुरुस्त कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
लेकिन सवाल यही है कि भुगतान और प्रक्रिया के बीच मरीज कितने दिन इंतजार करें? डायलिसिस ऐसा इलाज है जिसे मरीज अपनी सुविधा के हिसाब से टाल नहीं सकते।
मशीन के साथ सेंटर की दूसरी सुविधाएं भी सवालों में
मरीजों की परेशानी सिर्फ खराब मशीनों तक सीमित नहीं है। सेंटर तक पहुंचने वाला रास्ता करीब दो फीट चौड़ा बताया जा रहा है। गंभीर मरीजों को वाहन या स्ट्रेचर से अंदर ले जाने में परिजनों को परेशानी होती है।
सेंटर की दीवारों में पानी का रिसाव और सीलन की समस्या भी बताई जा रही है। यानी जिस जगह किडनी मरीजों को नियमित और लंबे इलाज की जरूरत है, वहां मशीन से लेकर पहुंच और भवन की स्थिति तक कई सवाल सामने आ रहे हैं।
विभाग में समीक्षा और सुधार के दावे, लेकिन गुमला में मरीज इंतजार में
जून 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान सरकारी अस्पतालों में इलाज, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के निर्देश दिए थे। उस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी मौजूद थे।
हाल के दिनों में स्वास्थ्य विभाग ने गुमला समेत चार जिलों में टेली-आईसीयू जैसी नई सुविधाओं की शुरुआत भी की है।
लेकिन गुमला सदर अस्पताल का डायलिसिस सेंटर यह सवाल छोड़ रहा है कि नई सुविधाओं की घोषणा और मौजूदा सुविधाओं को चालू रखने की जिम्मेदारी के बीच तालमेल कहां है?
फिलहाल गुमला के 29 मरीजों के लिए सबसे जरूरी बात किसी नए ऐलान की नहीं, बल्कि बंद पड़ी मशीनों के दोबारा चालू होने की है।
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