Sunday, October 25

पलामू। झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी कई मौकों पर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और उसे बेहतर मुकाम तक पहुंचाने की बात कह चुके हैं। लेकिन अगर सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत देखें, तो तस्वीर कई सवाल खड़े करती है।

पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में पलामू सदर SDM के निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, उसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपनी ड्यूटी से नदारद मिले। वहीं, सरकारी अस्पताल की टेबल पर एक निजी लैब का विजिटिंग कार्ड भी मिला, जिसके बाद अस्पताल परिसर में निजी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रचार-प्रसार को लेकर सवाल उठने लगे।

एक तरफ मंत्री जी के दावे… दूसरी तरफ अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार सुधार की बात करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन दावों का असर आखिर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?

जिस सरकारी अस्पताल में मरीज इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां अगर निरीक्षण के दौरान ही डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिलें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मंत्री जी… आखिर कहां गए आपके वो बड़े-बड़े दावे?

अगर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी ही सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर आखिर किस आधार पर तैयार की जा रही है?

सरकारी टेबल पर निजी लैब का विजिटिंग कार्ड… आखिर क्यों?

निरीक्षण के दौरान सरकारी अस्पताल की एक टेबल पर निजी लैब का विजिटिंग कार्ड मिलने से एक और गंभीर सवाल सामने आया।

 

आखिर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के भीतर निजी लैब का विजिटिंग कार्ड कैसे पहुंचा? क्या अस्पताल परिसर में निजी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रचार की अनुमति है? और अगर नहीं है, तो फिर यह कार्ड सरकारी अस्पताल की टेबल तक कैसे पहुंचा?

डॉक्टर मरीजों की सेवा में व्यस्त हैं या निजी संस्थानों के प्रचार में?

डॉ. इरफान अंसारी जी, सवाल आपसे है – अगर आपके ही विभाग के अस्पताल में डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिलते और सरकारी टेबल पर निजी लैब का विजिटिंग कार्ड मिलता है, तो फिर जवाबदेही किसकी होगी?

सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने और उसे शीर्ष स्तर तक ले जाने की बात कर रही है, लेकिन अस्पतालों में ऐसी तस्वीरें सामने आने से इन दावों और हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है।

दवाएं मौजूद, लेकिन स्टॉक रजिस्टर अपडेट नहीं

निरीक्षण के दौरान अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता तो पाई गई, लेकिन स्टॉक रजिस्टर अपडेट नहीं मिला। स्वास्थ्य व्यवस्था में दवाओं की उपलब्धता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उनका सही रिकॉर्ड रखना भी है।

जब अस्पताल में दवाओं का रिकॉर्ड ही व्यवस्थित तरीके से अपडेट नहीं होगा, तो उनकी वास्तविक उपलब्धता और वितरण की निगरानी किस तरह होगी?

‘टॉप’ स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा… पहले CHC की तस्वीर तो बदले!

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कर रहे हैं। यह निश्चित तौर पर एक अच्छी सोच है। लेकिन किसी भी व्यवस्था की असली परीक्षा उसके दावों से नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत से होती है।

और पाटन CHC के निरीक्षण में सामने आई तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है।

मंत्री जी, राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘टॉप’ पर पहुंचाने का दावा अपनी जगह है… लेकिन उससे पहले क्या सरकारी अस्पतालों की यह जमीनी तस्वीर बदलना जरूरी नहीं है?

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