Wednesday, September 9

रांची। आर्य ज्ञान प्रचार समिति रांची द्वारा संचालित सीनियर सिटीजन होम के तत्वावधान में डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल, बरियातू रोड में आयोजित संगीतमय श्रीकृष्ण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने कृष्ण जन्म और उनके जीवन संघर्षों से जुड़े प्रसंगों का श्रवण किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य कुलदीप जी ने श्रीकृष्ण के जीवन के माध्यम से कठिन परिस्थितियों में धैर्य, ईश्वर भक्ति और समर्पण का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की यज्ञशाला में यज्ञ के साथ हुई। आचार्य कुलदीप जी ने यज्ञ संपन्न कराया और उपस्थित यजमानों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद आर्य ज्ञान प्रचार समिति रांची के प्रधान एसएल गुप्ता, आर्यसमाज रांची की संरक्षिका सुशीला गुप्ता, कोषाध्यक्ष संजय पोद्दार और कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष दिवाकर देव सहित अन्य पदाधिकारियों ने पुष्पमालाओं से कथावाचक का स्वागत किया। इसके बाद अतिथियों और आयोजकों ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया।

‘कष्ट इंसान को कुंदन बनाता है’

कथा के दौरान आचार्य कुलदीप जी ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म की परिस्थितियों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ऐसी परिस्थितियों में हुआ, जब उनके माता-पिता को अत्यंत कठिनाइयों और कष्टों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि आज के समय में लोगों के सामने उतने बड़े संकट नहीं हैं, जितने कष्ट श्रीकृष्ण के माता-पिता और स्वयं श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में सहे, इसके बावजूद छोटी-छोटी परेशानियों में मनुष्य विचलित हो जाता है।

आचार्य ने कहा कि ईश्वर भक्ति और समर्पण कठिनाइयों से निकलने का सबसे बड़ा सहारा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह सोना आग में तपकर कुंदन बनता है, उसी तरह जीवन के संघर्ष और कष्ट इंसान को निखारते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को स्वयं तय करना है कि वह परिस्थितियों से टूटेगा या संघर्षों से निखरकर कुंदन बनेगा।

13 सितंबर तक चलेगी कथा

आयोजकों के अनुसार संगीतमय श्रीकृष्ण कथा 8 से 12 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 4 बजे से 7 बजे तक आयोजित होगी। वहीं 13 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक कथा का आयोजन किया जाएगा।

दूसरे दिन का कार्यक्रम शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ शाम करीब सात बजे संपन्न हुआ।

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