Thursday, September 10

गुमला: जिला मुख्यालय से महज करीब दो किलोमीटर की दूरी… लेकिन तस्वीर ऐसी कि बारिश आते ही गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं। सड़क बदहाल है, पानी की निकासी का इंतजाम नहीं और बरसात में रास्ते की हालत और बिगड़ जाती है। आखिर कब तक सरकारी व्यवस्था का इंतजार किया जाए? इसी सवाल के बीच गुमला के कुकुर सेपटा गांव के ग्रामीणों ने अब विकास का मोर्चा खुद संभाल लिया।

रायडीह प्रखंड की नवागढ़ पंचायत के कुकुर सेपटा गांव में ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय श्रमदान कर सड़क को चलने लायक बनाने और जल निकासी के लिए नाली निर्माण का काम शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि जब समस्या उनकी है और समाधान के लिए बार-बार गुहार लगाने के बाद भी स्थायी व्यवस्था नहीं हो रही, तो आखिर वे कब तक हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहें?

बारिश में गांव का रास्ता बन जाता है मुसीबत

गांव मुख्य सड़क और नेशनल हाईवे से महज करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद बरसात के दिनों में यही दो किलोमीटर ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है।

बारिश होते ही सड़क की स्थिति बेहद खराब हो जाती है। पानी जमा होने और जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से आवागमन प्रभावित होता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को होती है, जिन्हें अस्पताल तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है।

स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि बारिश के मौसम में गांव का संपर्क लगभग कटने जैसी स्थिति बन जाती है।

जब सिस्टम नहीं बदला तो ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी

लगातार समस्या झेल रहे ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि अब वे केवल सरकारी पहल का इंतजार नहीं करेंगे। ‘अपना गांव, अपना विकास’ के संकल्प के साथ ग्रामीणों ने श्रमदान शुरू किया और नाली निर्माण के साथ सड़क को बेहतर बनाने की कोशिश में जुट गए।

ग्रामीणों के इस प्रयास की जानकारी मिलने पर पंचायत समिति सदस्य हिमांशु कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ श्रमदान किया और उनका उत्साह बढ़ाया।

चार साल से बैठकों में उठ रही समस्या, फिर भी स्थायी समाधान नहीं

पंचायत समिति सदस्य हिमांशु कुमार ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांव की सड़क समेत अन्य समस्याओं की जानकारी गुमला उपायुक्त और बीडीओ को कई बार दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

उनका कहना है कि पिछले करीब चार वर्षों से पंचायत समिति की बैठकों में सड़क निर्माण और गांव की दूसरी समस्याओं को शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन योजनाओं को अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अगर किसी गांव की समस्या लगातार चार वर्षों से सरकारी बैठकों में उठ रही है, तो फिर उसका समाधान आखिर कब होगा?

डीसी बोले- सड़क की जानकारी है, सरकार को भेजा जा रहा प्रस्ताव

इस मामले में गुमला उपायुक्त दिलीश्वर महतो ने माना कि सड़क की स्थिति खराब है और प्रशासन को इसकी जानकारी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।

डीसी के अनुसार, करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। जिला स्तर पर इतनी लंबी सड़क का निर्माण मुश्किल होने के कारण प्रस्ताव ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से भेजा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण कराया जाएगा।

ग्रामीणों का सवाल- प्रस्ताव कब सड़क बनेगा?

प्रशासन ने सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजने की बात कही है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानी आज की है। बरसात में बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और आम लोगों के आवागमन में दिक्कत आज हो रही है।

एक तरफ ग्रामीण अपने स्तर पर श्रमदान करके सड़क और नाली सुधारने में जुटे हैं, दूसरी तरफ करीब चार साल से योजनाओं को स्वीकृति मिलने का इंतजार है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कुकुर सेपटा के ग्रामीणों को आखिर कब तक अपने हिस्से के विकास के लिए खुद फावड़ा उठाना पड़ेगा?

और उससे भी बड़ा सवाल – जब जिला प्रशासन खुद सड़क की बदहाली को स्वीकार कर रहा है, तो इस दो किलोमीटर सड़क की समस्या का स्थायी समाधान जमीन पर कब दिखाई देगा?

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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