रांची: शहर की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक जगहों पर नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए होर्डिंग्स, यूनिपोल और मोनोपोल के खिलाफ अब रांची नगर निगम निर्णायक कार्रवाई करने जा रहा है। निगम ने करीब 350 नियम विरुद्ध विज्ञापन संरचनाओं को चिन्हित किया है और 10 सितंबर की मध्यरात्रि 12 बजे के बाद विशेष हटाओ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
खास बात यह है कि होर्डिंग्स को लेकर Jharkhand Digital की टीम लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रही है। शहर की सड़कों और फुटपाथों पर लगे नियम विरुद्ध विज्ञापन ढांचों से आम लोगों को होने वाली परेशानी और हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद जारी स्थिति को लेकर पहले भी विस्तृत खबर प्रकाशित की गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हटे थे होर्डिंग
Jharkhand Digital ने अपनी पिछली खबर में स्पष्ट किया था कि झारखंड हाईकोर्ट के 19 अगस्त के आदेश के बाद शहर के सभी होर्डिंग्स को एक साथ हटाने का निर्देश नहीं था। कार्रवाई होर्डिंग के लाइसेंस, उसकी जगह और नियमों के उल्लंघन के आधार पर की जानी थी।
खबर में यह भी बताया गया था कि बिना लाइसेंस वाले होर्डिंग्स पर नगर निगम सीधे कार्रवाई कर सकता है, जबकि वैध लाइसेंस वाले लेकिन नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले विज्ञापन ढांचों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत सात दिन का नोटिस देने का प्रावधान है।
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अब निगम ने खुद बताई कार्रवाई की तारीख
अब रांची नगर निगम की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि संबंधित विज्ञापन एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं को पहले ही सार्वजनिक सूचना के जरिए नियम विरुद्ध संरचनाएं हटाने का पर्याप्त समय दिया जा चुका है। इसके बावजूद करीब 350 होर्डिंग, यूनिपोल, मोनोपोल और अन्य विज्ञापन ढांचे अब भी नहीं हटाए गए हैं।
इसी के बाद निगम ने विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है। 10 सितंबर की रात 12 बजे के बाद चिन्हित संरचनाओं को चरणबद्ध तरीके से हटाने की कार्रवाई शुरू होगी। जरूरत पड़ने पर इन्हें जब्त भी किया जा सकता है।
अब सिर्फ नोटिस नहीं, जमीन पर दिखेगा एक्शन
नगर निगम ने साफ किया है कि अब संबंधित एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं को खुद संरचना हटाने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर नियम विरुद्ध ढांचों को हटाएंगी और कार्रवाई से जुड़ा खर्च या जब्ती की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी या विज्ञापनदाता की होगी।
यानी जिस मुद्दे पर अब तक नोटिस, नियम और अदालती आदेश की बात हो रही थी, वह अब मैदानी कार्रवाई के चरण में पहुंच गया है।
मुद्दा सिर्फ होर्डिंग का नहीं, लोगों के रास्ते का भी
नगर निगम ने इस कार्रवाई को नागरिकों के सुरक्षित और अवरोधमुक्त आवागमन से जोड़ते हुए कहा है कि सड़क, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट और बिजली के पोल जैसी सार्वजनिक परिसंपत्तियों पर नियम विरुद्ध विज्ञापन ढांचे लोगों के आवागमन में बाधा बनते हैं।
निगम ने सुप्रीम कोर्ट के 19 जून 2026 के Right to Walk से जुड़े फैसले और झारखंड हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कार्रवाई की बात कही है।
Jharkhand Digital ने लगातार उठाया सवाल
शहर में होर्डिंग्स को लेकर Jharkhand Digital की कवरेज का फोकस सिर्फ विज्ञापन हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कहां होर्डिंग लग सकता है, लाइसेंसधारी और अवैध ढांचे में क्या अंतर है और हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम की जिम्मेदारी क्या है, इन सवालों को भी प्रमुखता से सामने रखा गया।
Jharkhand Digital इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
