Thursday, September 10

 सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि बोर्ड मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा-छह के विद्यार्थियों को त्रि-भाषा नीति के दायरे से बाहर रखने की संभावना पर गंभीरता से विचार करे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने सीबीएसई की इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले को 17 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया। इसी दौरान पीठ ने बोर्ड से यह भी कहा कि वह मौजूदा सत्र में कक्षा-छह के छात्रों को इस नीति से बाहर रखने के व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करे। पीठ ने भरोसा जताया कि संबंधित अधिकारी अदालत के इस सुझाव को गंभीरता से लेंगे।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष यह चिंता रखी कि मामले में बार-बार हो रही स्थगन की प्रक्रिया अनुचित देरी का कारण बन रही है। उन्होंने दलील दी कि चूंकि छात्रों को अंततः परीक्षाओं में शामिल होना है, इसलिए इस अनिश्चितता से न सिर्फ छात्र बल्कि उनके अभिभावक भी चिंतित हैं और मामले के जल्द निपटारे की आवश्यकता है।

विवाद की जड़ में है कौन सी नीति

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित याचिकाओं का समूह सीबीएसई की उस नीति के खिलाफ है जिसके तहत कक्षा-नौ के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाओं को शामिल करना जरूरी है। बोर्ड द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार यह व्यवस्था एक जुलाई से ही प्रभाव में आ चुकी है।

पहले भी जता चुका है अदालत चिंता

यह पहला मौका नहीं जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर टिप्पणी की हो। बीते 20 अगस्त को हुई सुनवाई में भी अदालत ने इस नीति से जुड़ी दिक्कतों को सुलझाने की जरूरत पर बल दिया था और स्पष्ट किया था कि किसी भी सूरत में बच्चों पर किसी तरह का अनुचित दबाव नहीं पड़ना चाहिए। उस सुनवाई में पीठ ने एक अहम पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया था — उपलब्ध भाषा विकल्पों के अनुरूप पर्याप्त मानव संसाधन और बुनियादी ढांचा तैयार करने की चुनौती।

अदालत ने तब यह टिप्पणी भी की थी कि यदि बोर्ड ने कक्षा-छह को नीति लागू करने का प्रारंभिक बिंदु चुना है, तो इस वर्ष के लिए इसके छात्रों को छूट देने पर विचार किया जा सकता है, और इसे अगले शैक्षणिक वर्ष से चरणबद्ध ढंग से लागू किया जा सकता है।

अब मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी, जिस पर छात्रों और अभिभावकों दोनों की नजरें टिकी रहेंगी।

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