Friday, September 25

राँची के बहुचर्चित जून 2022 हिंसा और उपद्रव मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (JMFC) ऋत्विका सिंह की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए 5 अभियुक्तों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी दोषियों को धारा 147, 353/149, 504/149 और 120B के तहत 2-2 साल की साधारण कैद (Simple Imprisonment) और जुर्माने की सजा सुनाई है।

इन अभियुक्तों को हुई सजा
​कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए और सजा पाए अभियुक्तों के नाम निम्नलिखित हैं:

​मो. उस्मान उर्फ करण (निवासी- लोअर बाजार, राँची)

​मो. तवारू उर्फ तबारक कुरैशी (निवासी- लोअर बाजार, राँची)

​मो. सरफराज आलम (निवासी- बालूमाथ/राँची)
​मो. साबिर अंसारी (निवासी- लोअर बाजार, राँची)

​मो. अफसर उर्फ अफसर आलम (निवासी- मेन रोड, राँची)

क्या था पूरा मामला?

​यह मामला 10 जून 2022 का है। डेली मार्केट थाना के एएसआई सुमित कुमार भगत की लिखित शिकायत पर डेली मार्केट थाना कांड संख्या 16/2022 दर्ज किया गया था।
​दर्ज मामले के अनुसार, नूपुर शर्मा के विवादित बयान के विरोध में बिना प्रशासनिक अनुमति के एकरा मस्जिद से फिरायालाल चौक की ओर लगभग 8,000 से 10,000 लोगों का जुलूस निकाला गया था। आरोप था कि बेकाबू भीड़ ने भड़काऊ नारेबाजी की, पुलिस बल पर पथराव किया, सरकारी काम में बाधा डाली और अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की।
​पथराव में तत्कालीन डेली मार्केट थाना प्रभारी अवधेश ठाकुर समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जवान घायल हो गए थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग और नियंत्रित फायरिंग करनी पड़ी थी।

​अदालत की मुख्य टिप्पणियाँ

गैर-कानूनी मजमा साबित: अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बिना किसी अनुमति के 8,000 से 10,000 लोगों की भीड़ एकत्र होना और पुलिस के निर्देशों की अवहेलना करना गैर-कानूनी मजमा (Unlawful Assembly) का स्पष्ट रूप है।

धारा 148 और 341 से बरी:

धारा 148 (घातक हथियारों का इस्तेमाल) और 341 (रास्ता रोकना) के तहत पुख्ता सबूत न होने के कारण अभियुक्तों को इन धाराओं से बरी कर दिया गया।

आपराधिक इतिहास के कारण राहत से इनकार:* बचाव पक्ष ने अभियुक्तों के कम उम्र और छात्र होने का हवाला देते हुए प्रोबेशन (सदाचरण की हिदायत) पर छोड़ने की अपील की थी। लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा अभियुक्तों के पूर्व आपराधिक इतिहास (Criminal Antecedents) की जानकारी दिए जाने के बाद कोर्ट ने प्रोबेशन का लाभ देने से इनकार कर दिया।

​सजा का विवरण:
​धारा 147 (बलवा): 2 साल की साधारण कैद और ₹3,000 जुर्माना।
​धारा 353/149 (सरकारी काम में बाधा): 2 साल की साधारण कैद और ₹3,000 जुर्माना।
​धारा 504/149 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान): 2 साल की साधारण कैद और ₹3,000 जुर्माना।
​धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र): 6 महीने की कैद और ₹1,000 जुर्माना।
​(सभी सजाएँ एक साथ (Concurrently) चलेंगी तथा जुर्माने की राशि न देने पर 30 दिनों का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा)।
​फैसले के बाद अदालत ने सभी दोषियों के जमानत बंधपत्र (Bail Bonds) रद्द करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

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