रांची: मां-बाप अपने बच्चों को बड़े अरमानों के साथ घर से दूर पढ़ने भेजते हैं। किसी की आंखों में डॉक्टर बनने का सपना होता है, तो कोई इंजीनियर बनकर परिवार की तकदीर बदलना चाहता है। माता-पिता अपनी जरूरतें कम करते हैं, अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर लगाते हैं और हर दिन इस उम्मीद में जीते हैं कि एक दिन उनका बच्चा सफलता हासिल कर घर लौटेगा। लेकिन जब वही बच्चा घर लौटने के बजाय मौत की खबर बनकर पहुंचता है, तो उन माता-पिता पर क्या गुजरती होगी?
सपनों से भरी आंखें, भविष्य की उम्मीदें और घर में इंतजार करते माता-पिता… फिर अचानक एक ऐसी खबर, जो पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ देती है। राजधानी रांची में छात्र-छात्राओं की मौत के तीन मामलों ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर में BIT मेसरा की MSc छात्रा अंजलि सुमन की मौत, अक्टूबर में IIIT रांची के बीटेक छात्र आदित्य कुमार की मौत और अब झारखंड राय यूनिवर्सिटी के बीटेक छात्र मनीष कुमार की मौत की खबर सामने आई है।
तीन अलग-अलग मामले, अलग-अलग परिस्थितियां और जांच के अपने-अपने पहलू। लेकिन हर मामले के साथ एक सवाल और गहरा होता जा रहा है – आखिर हमारे बच्चे किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं? क्या उनकी परेशानियों को समय रहते समझा जा रहा है? क्या शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आपातकालीन सहायता को उतनी ही गंभीरता से लिया जा रहा है, जितनी गंभीरता से उनके भविष्य की बात की जाती है?
BIT मेसरा: हॉस्टल में मिली MSc छात्रा अंजलि सुमन की मौत
19 सितंबर 2026 को BIT मेसरा के हॉस्टल नंबर-9 में MSc की छात्रा अंजलि सुमन की मौत का मामला सामने आया था। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, हालांकि एक डायरी बरामद की गई थी।
पुलिस के शुरुआती बयान के मुताबिक, डायरी में पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े तनाव के संकेत मिले थे। उस समय पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की बात कही थी।
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर इस मामले में जांच पूरी होने, मौत का अंतिम कारण स्पष्ट होने या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
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IIIT रांची: आदित्य कुमार की मौत के बाद शिक्षा मंत्रालय ने बनाई जांच समिति
11 अक्टूबर को IIIT रांची के प्रथम वर्ष के बीटेक छात्र आदित्य कुमार की मौत का मामला सामने आया। उस समय संस्थान में मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही थीं। घटना के बाद परीक्षा के दबाव समेत विभिन्न संभावित पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन परीक्षा का दबाव ही मौत का कारण था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
घटना के बाद विद्यार्थियों ने विरोध-प्रदर्शन किया। छात्रों ने आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं और समय पर इलाज उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठाए गए थे। मामला केवल एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी सामने आए।
इस मामले में 13 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर रजनी अब्बी कर रही हैं। समिति में एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक और शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी शामिल किया गया है।
अभी जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट सामने आने या किसी व्यक्ति अथवा अधिकारी की जिम्मेदारी तय होने की पुष्टि नहीं है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संस्थान की व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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झारखंड राय यूनिवर्सिटी: बीटेक छात्र मनीष कुमार की मौत ने फिर खड़े किए सवाल
अब नामकुम थाना क्षेत्र के राजाउलातू स्थित झारखंड राय यूनिवर्सिटी के बीटेक छात्र मनीष कुमार की मौत की खबर सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मनीष किराये के मकान में रहते थे और बुधवार सुबह मृत पाए गए।
इस मामले में पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच की प्रगति से संबंधित जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
आखिर कब मिलेगा माता-पिता को जवाब?
माता-पिता बच्चों को पढ़ने के लिए घर से दूर भेजते हैं, तो उनके मन में चिंता जरूर होती है, लेकिन साथ ही भरोसा भी होता है कि उनका बच्चा सुरक्षित है और जरूरत पड़ने पर उसे मदद मिलेगी। जब किसी विद्यार्थी की मौत की खबर आती है, तो परिवार केवल अपना बच्चा नहीं खोता- उसके साथ जुड़ी उम्मीदें, योजनाएं और भविष्य के सपने भी बिखर जाते हैं।
रांची में सामने आए इन तीन मामलों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, चिकित्सा सहायता और संस्थानों की जवाबदेही पर गंभीर चर्चा की जरूरत पैदा की है। लेकिन चर्चा और चिंता से आगे बढ़कर जरूरी है कि हर मामले की जांच समय पर पूरी हो, तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और जहां किसी स्तर पर कमी मिले, वहां सुधार हो।


