एक महीने पहले ही उठाया गया था अवैध होर्डिंग का मामला, अब तक कार्रवाई नहीं; आखिर किसके संरक्षण में खड़े हैं ये होर्डिंग्स?
रांची: रांची नगर निगम इन दिनों शहर में लगे विज्ञापन बोर्ड और होर्डिंग्स को लेकर काफी सख्त नजर आ रहा है। 1 सितंबर को नगर निगम ने विज्ञापन एजेंसियों को नोटिस जारी कर नियमों का पालन करने और तय मानकों के विपरीत लगे बोर्ड हटाने का अल्टीमेटम दिया है। नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के ‘Right to Walk’ से जुड़े फैसले का हवाला देते हुए फुटपाथ और पैदल मार्ग को अवरोध मुक्त रखने की बात कही है।
लेकिन लीगल होर्डिंग्स और एजेंसियों पर नोटिस पर नोटिस जारी करने वाला नगर निगम अवैध होर्डिंग्स पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है?
लीगल होर्डिंग्स पर सख्ती, अवैध पर खामोशी क्यों?
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि डिवाइडर पर 12 फीट से कम ऊंचाई पर लगे विज्ञापन बोर्ड, स्ट्रीट लाइट पोल और बिजली के खंभों पर लगे बोर्ड, फुटपाथ और वॉकवे पर लगे विज्ञापन तथा पैदल यात्रियों के रास्ते में बाधा बनने वाले होर्डिंग्स पर कार्रवाई की जाएगी।
यानी नियम तो साफ हैं और नगर निगम ने कार्रवाई का दायरा भी तय कर दिया है। लेकिन जो होर्डिंग्स बिना अनुमति के लगाए गए हैं, उन पर कार्रवाई कब होगी? नियमों का हवाला देकर लीगल होर्डिंग्स लगाने वाली एजेंसियों को नोटिस दे सकता है, तो फिर उन होर्डिंग्स की जांच क्यों नहीं की जा रही, जिनकी वैधता को लेकर पहले से सवाल उठाए जा चुके हैं?
एक महीने पहले उठाया था मामला, अब तक कोई कार्रवाई नहीं
झारखंड डिजिटल की टीम ने करीब एक महीने पहले ही शहर में लगे कथित अवैध और जर्जर होर्डिंग्स का मामला प्रमुखता से उठाया था।
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खास तौर पर कांके रोड में लगे एक बड़े होर्डिंग को लेकर सवाल उठाए गए थे।
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, यह होर्डिंग बिना अनुमति के नगर निगम की जमीन पर लगाया गया है। लोगों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसे हटाया नहीं गया है। मामला सामने आने के करीब एक महीने बाद भी अगर स्थिति जस की तस है, तो सवाल उठना लाजिमी है।
आखिर नगर निगम की कार्रवाई पहुंच कहां तक रही है?
बात सिर्फ अवैध होर्डिंग की नहीं सुरक्षा की भी है
कांके रोड पर मुख्य सड़क के किनारे लगा यह बड़ा होर्डिंग लोगों के लिए परेशानी और संभावित खतरे का कारण बन सकता है। होर्डिंग की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बारिश और तेज हवा के दौरान अगर कोई जर्जर होर्डिंग गिरता है तो राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। मामला सिर्फ ‘अवैध विज्ञापन’ का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
इसके बावजूद इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
क्या नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ लीगल होर्डिंग्स तक सीमित है, जबकि अवैध होर्डिंग्स को लेकर आंखें बंद कर ली गई हैं?
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