रांची: राजधानी में होर्डिंग और पोस्टर के जरिए अपना प्रचार करने वाले डॉक्टरों और अस्पतालों पर झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल ने सख्ती दिखाई है। काउंसिल ने ऐसे आठ डॉक्टरों और उनसे जुड़े अस्पतालों व क्लीनिकों को नोटिस जारी किया है। इसमें चिकित्सकीय पेशे से जुड़े आचार और नैतिकता के नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई है।
काउंसिल के निबंधक-सह-सचिव डॉ. बिमलेश सिंह की ओर से जारी नोटिस में प्रोफेशनल कंडक्ट, एटिकेट एंड एथिक्स रेगुलेशंस, 2002 के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। नोटिस के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के आचार नियमों के विपरीत होर्डिंग और पोस्टर के माध्यम से निजी प्रचार करना नियमों का उल्लंघन है। जारी नोटिस के अनुसार सोशल मीडिया पर भी प्रचार प्रसार नहीं कर सकते है । इसपर भी प्रतिबंधित लगा दिया गया है।
डॉक्टरों के निजी प्रचार पर रोक
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि पंजीकृत चिकित्सकों के लिए निजी प्रचार और विज्ञापन करना प्रतिबंधित है। डॉक्टरों की तस्वीर, नाम, डिग्री या इलाज से संबंधित भ्रामक दावों के जरिए प्रचार करना चिकित्सकीय पेशे की गरिमा और निर्धारित आचार नियमों के खिलाफ है।
हालांकि, अस्पतालों की वेबसाइट पर डॉक्टरों के नाम, मान्य योग्यता, विशेषज्ञता, रजिस्ट्रेशन और उपलब्धता जैसी तथ्यात्मक जानकारी दी जा सकती है। इसी तरह अस्पताल का नाम, संपर्क विवरण, विभाग, जांच सुविधाएं, इमरजेंसी सेवा, मान्यता और फीस जैसी सत्यापन योग्य जानकारी भी प्रदर्शित की जा सकती है।
100% इलाज की गारंटी और भ्रामक दावों पर भी रोक
100 प्रतिशत इलाज की गारंटी या 100 प्रतिशत सफलता का दावा करना, बिना प्रमाण किसी डॉक्टर को नंबर-1 या सबसे बेहतर बताना और मरीजों की तस्वीरों, प्रशंसापत्रों या सेलिब्रिटी के समर्थन का प्रचारात्मक इस्तेमाल करना नियमों के दायरे में जांच का विषय है।
इसी तरह भ्रामक ऑनलाइन रिव्यू, भुगतान के जरिए रैंकिंग बढ़ाने और प्रचार के लिए इन्फ्लुएंसर का इस्तेमाल करने जैसे तरीकों पर भी रोक से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं। इन नियमों का उद्देश्य मरीजों को भ्रामक दावों से बचाना और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जानकारी को तथ्यात्मक बनाए रखना है।
प्रचार पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर हो सकती है कार्रवाई
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि पंजीकृत चिकित्सकों के लिए निजी प्रचार और विज्ञापन करना प्रतिबंधित है। डॉक्टरों की तस्वीर, नाम, डिग्री या इलाज से संबंधित भ्रामक दावों के जरिए प्रचार करना चिकित्सकीय पेशे की गरिमा और निर्धारित आचार नियमों के खिलाफ माना जाता है।
नोटिस में नियमों के उल्लंघन पर चेतावनी, आर्थिक दंड और चिकित्सक के पंजीकरण को निलंबित करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है। संबंधित डॉक्टरों और अस्पतालों को होर्डिंग-पोस्टर की छायाप्रति के साथ नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से 6 अक्टूबर को जारी आदेश की प्रति भी भेजी गई है।
झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल ने इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों और मेडिकल कॉलेजों को भी पत्र जारी किया है। काउंसिल ने संकेत दिया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
चिकित्सकों के प्रचार और विज्ञापन को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों में स्पष्ट किया गया है कि डॉक्टर अपनी सेवाओं का प्रचार करते समय चिकित्सकीय नैतिकता और निर्धारित आचार संहिता का पालन करें। इन नियमों के तहत निजी प्रचार, भ्रामक दावों और मरीजों को आकर्षित करने के लिए किए जाने वाले प्रचारात्मक तरीकों पर रोक है। जानिए, इन नियमों में क्या प्रावधान हैं और उल्लंघन पर क्या कार्रवाई हो सकती है।
नई गाइडलाइन्स के मुख्य नियम
1. डॉक्टरों की फोटो वाले विज्ञापन
-
मरीजों को आकर्षित करने या निजी प्रचार के लिए डॉक्टरों की तस्वीरों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
-
अस्पताल की वेबसाइट पर डॉक्टरों के नाम, मान्य योग्यता, विशेषज्ञता, रजिस्ट्रेशन और उपलब्धता जैसी तथ्यात्मक जानकारी दी जा सकती है।
2. अस्पताल के होर्डिंग पर क्या दिखा सकते हैं?
-
अस्पताल का नाम, संपर्क विवरण, विभाग और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं।
-
डायग्नोस्टिक सुविधाएं, इमरजेंसी सेवा, मान्यता और फीस जैसी सत्यापन योग्य जानकारी।
-
सार्वजनिक स्थानों पर अधिकृत होर्डिंग के जरिए भी तथ्यात्मक जानकारी ही प्रदर्शित की जानी चाहिए।
3. किन दावों और प्रचार तरीकों पर रोक है?
-
“100% इलाज की गारंटी” या “100% सफलता” जैसे अप्रमाणित दावे।
-
बिना वस्तुनिष्ठ प्रमाण के “नंबर-1 डॉक्टर”, “सबसे बेहतर” या “सबसे भरोसेमंद” होने का दावा।
-
मरीजों की तस्वीरों, प्रशंसापत्रों और सेलिब्रिटी के समर्थन का प्रचारात्मक इस्तेमाल।
-
भ्रामक ऑनलाइन रिव्यू, भुगतान के जरिए रैंकिंग बढ़ाना और प्रचार के लिए इन्फ्लुएंसर का इस्तेमाल।
4. नियमों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
-
मामले के अनुसार सुधार के निर्देश, चेतावनी या निंदा।
-
नैतिकता संबंधी प्रशिक्षण।
-
चिकित्सक के पंजीकरण पर प्रतिबंध या निलंबन जैसी कार्रवाई।
-
कार्रवाई जांच, लागू नियमों और संबंधित प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र के आधार पर होगी; यह स्वतः नहीं होती।
इन डॉक्टरों और अस्पतालों को मिला नोटिस
नोटिस पाने वालों में डॉ. सरबजया सिंह और मिराई फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर, डॉ. एसएन यादव और डॉ. अपूर्व रंजन तथा मां रामप्यारी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, डॉ. निवेदिता मिश्रा और झारखंड लेप्रोस्कोपी एंड गायनी सेंटर शामिल हैं।
इसके अलावा डॉ. सौम्या सिन्हा और बेला इंटिस, डॉ. निधि निकुंज व डॉ. निशिता अखौरी और फ्रेया आईवीएफ, डॉ. नेहा रानी और स्किन ब्लिस क्लिनिक, डॉ. जावेद अख्तर हुसैन व डॉ. वकार अहमद और लेक व्यू हॉस्पिटल तथा डॉ. स्वाति सिंह और स्पर्श आई क्लिनिक को भी नोटिस जारी किया गया है।
काउंसिल की इस कार्रवाई का उद्देश्य चिकित्सकों के प्रचार-प्रसार से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना और चिकित्सा पेशे में निर्धारित नैतिक मानकों को बनाए रखना है।
