Friday, October 30

रांची में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का बड़ा एक्शन, अपराधी के पैर में लगी गोली

घायल अपराधी का नाम सौरभ कुमार बताया जा रहा

कोयला कारोबारी के घर फायरिंग के 12 घंटे के भीतर घेराबंदी कर दबोचे गए अपराधी

राजधानी रांची में रंगदारी, फायरिंग और आपराधिक गतिविधियों के जरिए दहशत फैलाने वाले राहुल दुबे गिरोह के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। महज 72 घंटे के भीतर राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह के साथ रांची पुलिस की दूसरी मुठभेड़ हुई है। धुर्वा थाना क्षेत्र के रिंग रोड के समीप सीठियो इलाके में शुक्रवार को हुई इस मुठभेड़ में पुलिस की जवाबी फायरिंग में गिरोह के एक अपराधी को गोली लगी है। वहीं, पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर घेराबंदी कर गिरोह से जुड़े कुल पांच अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अपराधियों के पास से चार से अधिक पिस्टल, जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। इससे पूर्व राहुल सिंह गिरोह के साथ पुलिस की कांके रिंग रोड के समीप मुठभेड़ हुई थी जिसमें शाहिद नामक अपराधी पुलिस की गोली से घायल हो गया था.

इस कार्रवाई को राजधानी में सक्रिय आपराधिक गिरोहों के खिलाफ पुलिस की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। खास बात यह है कि हजारीबाग के एके इंटरनेशनल होटल और रांची के कांके थाना क्षेत्र में कोयला कारोबारी के घर हुई गोलीबारी की घटनाओं के बाद पुलिस ने महज कुछ घंटों के भीतर अपराधियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि रंगदारी और गोलीबारी के जरिए कारोबारियों को डराने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है।

कारोबारी के घर गोलियों की बौछार से मचा था हड़कंप

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत कांके थाना क्षेत्र के प्रेमनगर से हुई, जहां कोयला कारोबारी संजय करमाली के आवास को अपराधियों ने निशाना बनाया। बीती रात हथियारों से लैस अपराधियों ने उनके घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। अपराधियों का मकसद कारोबारी और उनके परिवार के बीच भय का माहौल पैदा करना बताया जा रहा है।

घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। राजधानी में लगातार हो रही गोलीबारी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने तत्काल विशेष टीम गठित की। टीम को अपराधियों की पहचान करने, उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने और शहर से बाहर भागने से पहले उन्हें गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी दी गई।

गुप्त सूचना ने खोली अपराधियों की लोकेशन

पुलिस को शुक्रवार को गुप्त सूचना मिली कि राहुल दुबे गिरोह से जुड़े अपराधी कांके में फायरिंग की घटना को अंजाम देने के बाद रांची से फरार होने की तैयारी में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में घेराबंदी शुरू कर दी। संभावित रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की गई।

पुलिस की इस रणनीति का नतीजा रहा कि अलग-अलग स्थानों से गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अपराधियों ने अपने एक अन्य साथी के धुर्वा थाना क्षेत्र के रिंग रोड के पास सीठियो इलाके में पहुंचने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस टीम ने उस इलाके में भी निगरानी और घेराबंदी तेज कर दी।

पुलिस को देखते ही अपराधी ने शुरू कर दी फायरिंग

सीठियो इलाके में पुलिस टीम जैसे ही संदिग्ध अपराधी को पकड़ने के लिए पहुंची, उसने पुलिसकर्मियों को देखते ही गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, जवानों ने पहले अपनी पहचान बताते हुए अपराधी को चेतावनी दी, लेकिन इसके बावजूद उसकी ओर से फायरिंग जारी रही। इसके बाद पुलिस टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की।

इस दौरान पुलिस की गोली अपराधी के पैर में लगी। गोली लगने के बाद वह मौके पर गिर पड़ा, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे अपने कब्जे में लिया। घायल अपराधी को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इस मुठभेड़ के साथ ही पुलिस ने गिरोह के पांचवें सदस्य को भी गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, पुलिस की ओर से सभी गिरफ्तार आरोपियों की विस्तृत भूमिका और पहचान के संबंध में आगे की जांच की जा रही है।

हथियारों का जखीरा मिला, कई वारदातों में इस्तेमाल हुई बाइक भी जब्त

मुठभेड़ और गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियारों की बरामदगी की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चार से अधिक पिस्टल, कई राउंड जिंदा कारतूस और अपराधियों के आवागमन तथा वारदातों में इस्तेमाल की गई कई मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं।

हथियारों की इस बरामदगी ने पुलिस के सामने कई नए सवाल भी खड़े किए हैं। गिरोह के पास इतने हथियार कहां से पहुंचे? क्या इन हथियारों का इस्तेमाल केवल रंगदारी के लिए किया जा रहा था या इनके जरिए दूसरी आपराधिक घटनाओं को भी अंजाम देने की योजना थी? पुलिस अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। बरामद हथियारों और कारतूसों को लेकर भी तकनीकी जांच की जा सकती है, ताकि पूर्व की घटनाओं से इनके संभावित संबंधों का पता लगाया जा सके।

छापर बालू घाट गोलीकांड से भी जुड़ रहे गिरोह के तार

राहुल दुबे गिरोह की गतिविधियां केवल कांके में हुई ताजा फायरिंग तक सीमित नहीं बताई जा रही हैं। शुरुआती पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरोह के सदस्य क्षेत्र में रंगदारी वसूलने और अपना दबदबा कायम करने के लिए लगातार आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे थे।

कुछ दिन पहले बुढ़मू थाना क्षेत्र के छापर बालू घाट पर हुई गोलीबारी की घटना में भी इसी गिरोह के सदस्यों की संलिप्तता सामने आने की बात कही जा रही है। बालू घाट और कोयला कारोबार जैसे आर्थिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों में गोलीबारी की घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आपराधिक गिरोह कारोबारियों और ठेकेदारों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन सभी मामलों में आरोपियों की भूमिका की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

72 घंटे में दूसरी मुठभेड़, पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

राहुल दुबे गिरोह के साथ 72 घंटे के भीतर दूसरी मुठभेड़ ने राजधानी में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस के लिए अब चुनौती केवल गिरफ्तार पांच अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि गिरोह के फरार सदस्यों, हथियारों के स्रोत और रंगदारी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना भी है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी दल-बल के साथ मुठभेड़ स्थल पर पहुंचे। पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार अपराधियों के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा हाल की अन्य गोलीबारी की घटनाओं में उनकी क्या भूमिका रही है।

फिलहाल पांच गिरफ्तारियों और हथियारों की बरामदगी को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। लेकिन राजधानी के कारोबारियों के बीच सुरक्षा का भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी होगा कि गिरोह के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाए और रंगदारी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि राहुल दुबे गिरोह का आपराधिक नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ है और राजधानी में हुई हालिया गोलीबारी की घटनाओं के पीछे उसकी वास्तविक भूमिका क्या रही है।

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