रांची: राजधानी रांची के ओरमांझी थाना पुलिस ने करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़ करते हुए महिला समेत तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस गिरफ्त में आने वाली महिला के साथ दो अपराधी पकड़े गए हैं जिनपर पूर्व में भी एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. कार रेंटल के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आने का बाद पुलिस इनके अन्हैय सहयोगियों की तलाश कर रही है। आरोप है कि महिला ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों से महंगी गाड़ियां किराए पर लेती थी और फिर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें तीसरे लोगों के पास मोटी रकम लेकर गिरवी रख देती थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस तरीके से करीब 20 से 25 लोगों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने आरोपी महिला ज्योति कुमारी, विश्वजीत सिंह और मनोज श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। ज्योति कुमारी उर्फ बाबी जहां सहरसा की रहने वाली है और रांची के बूटी मोड़ में रहती है वहीं मनोज श्रीवास्तव और विश्वजीत सिंह मूल रुप से मुंगेर के रहने वाले हैं और बूटी मोड़ में रहते हुए अपना धंधा चलाते हैं.

रातू रोड स्थित शुभ यात्रा ट्रैवल्स का संचालक है विश्वजीत
पुलिस गिरफ्त में आने वाला शातिर अपराधी विश्वजीत कुमार पूर्व में भी कई बड़े कांड कर चुका है। इसके खिलाफ कांके थाना में 4 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इसके अलावा ओरमांझी थाना में भी हत्या और आर्म्स ऐक्ट के मामले दर्ज हैं। विश्वजीत कुमार रातू रोड के शुभ यात्रा ट्रैवल्स का संचालक है और बूटी मोड़ के पास रहता है। इसके पास से पुलिस ने दो आधार कार्ड बहरामद किए हैं जिनकी जांच की जा रही है। इसके साथ गिरफ्तार मनोज कुमार भी पूर्व में जेल जा चुका है और वह इन अपराधियों के लिए ग्राहक फंसा कर लाने का काम करता था।
ऐसे दिया जाता था ठगी को अंजाम
बताया जा रहा है कि आरोपी महिला पहले ट्रैवल एजेंसियों, कार रेंटल संचालकों और निजी गाड़ी मालिकों से संपर्क करती थी। वह शुरुआत में स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर और बोलेरो जैसी महंगी गाड़ियां ऊंचे किराए पर लेती थी। समय पर भुगतान कर वह वाहन मालिकों का भरोसा जीत लेती थी। गाड़ी हाथ में आने के बाद उसके फर्जी एग्रीमेंट और एनओसी तैयार किए जाते थे। कुछ दस्तावेजों पर वाहन मालिकों के जाली हस्ताक्षर किए जाने की भी आशंका है। इसके बाद गाड़ियों को रांची और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तीसरे पक्ष के पास तीन से पांच लाख रुपये तक में गिरवी रख दिया जाता था।
किराया बंद हुआ तो खुलने लगी पोल
मामले का खुलासा तब हुआ, जब वाहन मालिकों को तय समय पर किराया मिलना बंद हो गया और आरोपी महिला का मोबाइल फोन भी लगातार स्विच ऑफ आने लगा। परेशान वाहन मालिकों ने अपनी गाड़ियों की तलाश शुरू की। कुछ लोगों ने जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए गाड़ियों की लोकेशन पता की, तो वे बताए गए रूट से अलग दूसरी जगहों और गैरेज में मिलीं। जांच करने पर कथित तौर पर पता चला कि गाड़ियां किसी अन्य व्यक्ति के पास गिरवी रखी गई हैं। इसके बाद कई पीड़ितों ने एक साथ ओरमांझी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने महिला को किया गिरफ्तार, गिरोह की भूमिका की जांच
शिकायतों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ओरमांझी थाना पुलिस ने आरोपी महिला की तलाश शुरू की। गुप्त सूचना और तकनीकी सेल की मदद से उसके ठिकाने का पता लगाया गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती पूछताछ में महिला द्वारा ठगी की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में महिला अकेले शामिल थी या उसके साथ कोई संगठित गिरोह भी काम कर रहा था। फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और गाड़ियों को गिरवी रखने में मदद करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
कई गाड़ियों की पहचान, बरामदगी की प्रक्रिया जारी
अब तक करीब 20 से 25 लोगों के इस ठगी का शिकार होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर गिरवी रखी गई कई गाड़ियों की पहचान की है। उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया चल रही है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद गाड़ियों को वास्तविक मालिकों को सौंपने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह मामला उन वाहन मालिकों के लिए भी चेतावनी है, जो अपनी गाड़ियां किराए पर चलाते हैं। किसी को वाहन सौंपने से पहले पहचान और पते का सत्यापन, लिखित एग्रीमेंट तथा पुलिस वेरिफिकेशन कराना जरूरी है। इसके साथ ही जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित रूप से गाड़ी की वास्तविक लोकेशन की जांच भी की जानी चाहिए।


